आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2011 तक बैंकों के पास 2481.39 करोड़ रुपये पड़े थे, जिनका कोई दावेदार नहीं था। इस पूंजी का बड़ा हिस्सा उन व्यक्तियों का होता था, जिनके गुजरने के बाद उनके बैंक खातों का नॉमिनी नहीं होता था। सरकार ने साल 1983 में बैंकिंग नियमों में बदलाव करके सभी बैंक खातों के लिए नॉमिनेशन फैसिलिटी मुहैया कराई थी। हालांकि, अब भी कई लोग इससे बेखबर हैं और अपने खातों के लिए नॉमिनी नहीं चुनते हैं। लेकिन, ये बहुत जरूरी है।
