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क्या आपने बैंक खाते का नॉमिनी चुना है?

सिंगल अकाउंट या ज्वाइंट अकाउंट के लिए नॉमिनी फॉर्म डीए-1 के जरिए चुना जा सकता है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 04, 2013 पर 10:56 AM
क्या आपने बैंक खाते का नॉमिनी चुना है?

आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2011 तक बैंकों के पास 2481.39 करोड़ रुपये पड़े थे, जिनका कोई दावेदार नहीं था। इस पूंजी का बड़ा हिस्सा उन व्यक्तियों का होता था, जिनके गुजरने के बाद उनके बैंक खातों का नॉमिनी नहीं होता था। सरकार ने साल 1983 में बैंकिंग नियमों में बदलाव करके सभी बैंक खातों के लिए नॉमिनेशन फैसिलिटी मुहैया कराई थी। हालांकि, अब भी कई लोग इससे बेखबर हैं और अपने खातों के लिए नॉमिनी नहीं चुनते हैं। लेकिन, ये बहुत जरूरी है।

नॉमिनी चुनने के प्रक्रिया

सिंगल अकाउंट या ज्वाइंट अकाउंट के लिए नॉमिनी फॉर्म डीए-1 के जरिए चुना जा सकता है। खातेदार की मौत के बाद चुने गए व्यक्ति को अकाउंट में पड़ी राशि मिलेगी। ये फॉर्म बैंक के हर प्रकार के खाते के लिए लागू होता है, जैसे सेविंग अकाउंट,

रिकरिंग अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट अकाउंट, करंट अकाउंट। खाते खोलते समय ये फॉर्म भरा जाता है। अगर ऐसा नहीं किया है तो बाद में भी इस फॉर्म को भरकर नॉमिनी चुन सकते हैं।

अगर चुने गए नॉमिनी में बदलाव करना है तो फॉर्म डीए-3 के जरिए ये किया जा सकता है। नॉमिनेशन रद्द करने के लिए फॉर्म डीए-2 का इस्तेमाल करें। नॉमिनेशन रद्द करते वक्त बेहतर रहेगा कि नए नॉमिनी के लिए तुरंत फॉर्म डीए-1 भर दें।

नॉमिनी में फेरबदल कई बार किए जा सकते हैं। जरूरी है कि बैंक से नॉमिनेशन भरने की अर्जी की रसीद ली जाए। भरे गए नॉमिनेशन फॉर्म के फोटोकॉपी जरूर रखें।

नॉमिनी कौन चुन सकता है

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