Adhik Maas 2026: अधिक मास में अधिक पुण्य एकत्र करने के लिए आज से 5 दिन हैं अहम, अभी चूके तो 3 साल तक नहीं मिलेगा मौका

Adhik Maas 2026: हिंदू धर्म में अधिक मास का अहम स्थान है। यह अतिरिक्त महीना तीन साल में एक बार आता है, जब भक्तों को अतिरिक्त पुण्य अर्जित करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस साल आज से 5 दिनों का समय बेहद पुण्यदायी है। आइए जानें क्या है इसका महत्व और कैसे पाएं इसका लाभ

अपडेटेड May 27, 2026 पर 11:39 AM
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एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक अधिक मास की इन तिथियों में स्नान-दान बहुत पुण्यदायी होता है।

Adhik Maas 2026: हिंदू कैलेंडर में चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच के अंतर को भरने के हर तीन साल में एक अतिरिक्त मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। शास्त्रों में इसे पुरुषोत्तम मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। इस मास के स्वामी स्वयं सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु हैं। अधिक मास हिंदू कैलेंडर के किसी माह के में जोड़ा जाता है, जिससे उसकी अवधि 28-30 दिनों से बढ़ कर 59-60 दिनों की हो जाती है। एक और खास बात ये है कि इस महीने में 4 एकादशी, 4 प्रदोष व्रत, 2 पूर्णिमा और 2 अमावस्या का संयोग बनता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास कई वर्षों के बाद लगा है, जिसकी शुरुआत 17 मई, 2026 से हुई थी। ज्येष्ठ अधिक मास का समापन 15 जून, 2026 को होगा। आज ज्येष्ठ अधिक मास की एकादशी यानी पद्मिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। इसके बाद ज्येष्ठ अधिक मास का प्रदोष व्रत और फिर पूर्णिमा आएगी। यह ऐसा दुर्लभ संयोग है, जिसके लिए तीन साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी से लेकर पूर्णिमा तक अधिक मास की इन तिथियों में स्नान-दान और पूजा-पाठ बहुत पुण्यदायी माना जाता है।

अधिक मास की पहली एकादशी आज

आज अधिक मास की पहली एकादशी, पद्मिनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी व्रत को करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसे पुरुषोत्तम और कमला एकादशी व्रत भी कहते हैं।

अधिक मास प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत अधिक मास में और भी अधिक पुण्यकारी हो जाता है। इस दिन विष्णु जी के साथ भगवान शिव की कृपा भी मिलती है। प्रदोष व्रत उस दिन होता है, जिस दिन द्वादशी और त्रयोदशी का संयोग हो। प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से कुंडली के सभी ग्रह दोष खासकर शनि और राहु के दूर होते हैं। 28 मई (गुरुवार) को अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी तिथि प्रातः 07.58 मिनट तक पश्चात त्रयोदशी तिथि।


अधिक मास की पूर्णिमा

अधिक मास की पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने का सबसे अहम दिन माना जाता है। अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं। इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पितृ दोष शांत होता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा का भी विधान है। पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र दोष में शांति मिलती है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है।

इस बार दो दिन पूर्णिमा का योग

इस बार अधिकमास की पूर्णिमा शनिवार और रविवार दोनों दिन रहेगी। व्रत की पू्र्णिमा शनिवार को और स्नान दान की पूर्णिमा रविवार को रहेगी। इस दिन पितरों के लिए तर्पण और दान और दीपदान भी बहुत खास माना गया है।

30 मई : अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी तिथि प्रातः 11.58 मिनट तक पश्चात पूर्णिमा तिथि।

भद्रा : प्रातः 11.58 मिनट से रात्रि 01.06 मिनट तक। श्री सत्यनारायण व्रत। व्रत की पूर्णिमा।

31 मई : अधिक मास ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि दोपहर 02.15 मिनट तक पश्चात प्रतिपदा तिथि। ज्येष्ठी योग। स्नान-दानादि की अधिक मासीय ज्येष्ठी पूर्णिमा। गंडमूल सायं 04.12 मिनट से।

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