Adhik Maas Shradh Amavasya 2026: इस साथ ज्येष्ठ मास में अधिक मास का अत्यंत दुर्लभ और पवित्र संयोग बना है। अधिक मास की अवधि में पुण्य प्राप्त करने का अवसर दोगुना हो जाता है। इस अवधि में आने वाली विशेष तिथियों का भी अलग महत्व है। 17 मई 2026 को शुरू हुआ ज्येष्ठ अधिक मास अब अपने समापन की ओर है। इस माह की अमावस्या तिथि को पितरों की शांति के लिए बेहद अहम दिन माना जाता है। इस अमावस्या पर पितरों की मुक्ति का असवर तीन साल में एक बार मिलता है। इस साल यह तिथि सोमवार के दिन पड़ रही है, जिससे इस दिन सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। इस दिन पूजा, पाठ, तर्पण, श्राद्ध करने से और हरि कृपा से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
