Ahoi ashtami vrat niyam: आज के व्रत में इन नियमों का है बहुत महत्व, भूल से भी इनकी अनदेखी न करें

Ahoi ashtami vrat niyam: माताएं आज अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत कर रही हैं। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किए जाने वाले इस व्रत में कुछ नियमों का बहुत महत्व है। इनकी अनदेखी बिलकुल नहीं करनी चाहिए। आइए जानें इनके बारे में

अपडेटेड Oct 13, 2025 पर 12:34 PM
इस व्रत के कुछ नियम हैं, जिनका बहुत महत्व है।

Ahoi ashtami vrat niyam: अहाई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। इस साल ये व्रत आज यानी 13 अक्टूबर को किया जा रहा है। माताएं ये व्रत अपनी संतान की लंबी उम्र और उसकी सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत के लिए करती हैं। अहोई अष्टमी के व्रत में माताएं सूर्योदय से लेकर शाम तक निर्जला उपवास करती हैं और तारों या कुछ जगहों पर चंद्रमा की पूजी-अर्घ्य के बाद व्रत का समापन करती हैं। इस व्रत के कुछ नियम हैं, जिनका बहुत महत्व है और इनका पालन करना भी बहुत जरूरी माना जाता है। आइए जानें इनके बारे में

पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 05:53 बजे से 07:08 बजे तक

पूजा की अवधि : 01.15 घंटा

तारों को देखने का समय : शाम 06:17 बजे

चंद्रोदय का समय : रात 11:20 बजे

अहोई अष्टमी व्रत के नियम


  • अहोई अष्टमी के दिन चांदी की स्याहू माला पहनी जाती है, इसके बिना ये व्रत पूरा नहीं होता है इसमें हर साल चांदी के दो मोती डलवाना अनिवार्य है। संतान की संख्या के हिसाब से उनके दो-दो दाने हर साल डालते हैं।
  • आज इसकी पूजा करनें के बाद इसे अनिवार्य रूप से पहना जाता है। इस माला को दीवाली के बाद किसी शुभ दिन पर अहोई को गुड़ से भोग लगाकर और जल के छीटे देकर उतारा जाता है।
  • अहोई अष्टमी के दिन महिलाओं को भूलकर भी मिट्टी से संबंधित काम नहीं करने चाहिए। इस दिन मिट्टी खोदना सब्जी काटना वर्जित है।
  • इसके अलावा कैंची, सुई आदि से संबंधित काम भी नहीं करने चाहिए। ऐसा कुछ ना करें, जिससे किसी छोटे से जीव को भी नुकसान पहुंचे। अहोई अष्टमी के दिन शाम के तारों के दर्शन के बाद ही अपने व्रत का पारण करें। अपनी संतान को इस दिन उपहार स्वरूप कुछ दें, चाहे खिलौने या नए कपड़े।
  • महिलाओं को अहोई अष्टमी व्रत की पूजा हमेशा भगवान गणेश के आह्वान के साथ करें। इस दिन काले या गहरे नीले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
  • अहोई अष्टमी पर कांसे के लोटे से अर्घ्य नहीं दें। इस व्रत की पूजा में पहले इस्तेमाल हुई पूजा सामग्री का प्रयोग दोबारा नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन खान-पान में प्याज और लहसुन का प्रयोग करने से बचें। अहोई अष्टमी व्रत के दौरान महिलाओं को दिन में सोना नहीं चाहिए और बुजुर्गों का अनादर करने से बचें।

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