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Annakut Puja 2025: आज के दिन श्री कृष्ण ने तोड़ा था इंद्र देव का घमंड, जानें इस पर्व की पौराणिक कथा

Annakut Puja 2025: हिंदू धर्म में अन्नकूट का पर्व बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण ने इस दिन इंद्र देव का घमंड तोड़ा था। आइए जानें इस दिन से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है?

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 22, 2025 पर 7:57 AM
Annakut Puja 2025: आज के दिन श्री कृष्ण ने तोड़ा था इंद्र देव का घमंड, जानें इस पर्व की पौराणिक कथा
पंचांग के अनुसार इस साल अन्नकूट का पर्व 22 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।

Annakut Puja 2025: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। ये दिन भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और इसी दिन उन्होंने देवताओं के राजा इंद्र का घमंड तोड़ दिया था। ये त्योहार आमतौर पर दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है, लेकिन इस साल तिथियों में अंतर होने की वजह से ये पर्व दिवाली के अगले दिन नहीं, उसके एक दिन बाद यानी 22 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। ये त्योहार हिंदू धर्म में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि ये पर्व हमें प्रकृति का आभार व्यक्त करना सिखाता है। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा और इसका पूजा मुहूर्त

अन्नकूट पर्वत की पौराणिक कथा

विष्णु पुराण में गोवर्धन से सम्बंधित एक कथा का वर्णन है। एक समय स्वर्ग के राजा इंद्र को अपनी शक्तियों पर अहंकार हो गया था। उनके घमंड को तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने एक लीला रचाई थी। एक बार सभी गोकुलवासी तरह-तरह के व्यंजन बना रहे थे, साथ ही खुशी से गीत गा रहे थे। सब तरफ उत्सव सा माहौल देखकर कृष्ण ने अपनी मां यशोदा से इसके बारे में पूछा। श्रीकृष्ण के सवाल पर मैया यशोदा ने कहा कि, हम देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे हैं। श्रीकृष्ण ने फिर प्रश्न किया कि हम देवराज इंद्र की पूजा क्यों करते हैं। इस पर यशोदा मां ने कहा, इंद्र देव की कृपा से अच्छी बारिश होती है जिससे अन्न की पैदावार अच्छी होती है, हमारी गायों को चारा मिलता है।

उनकी बात सुनकर भगवान कृष्ण ने कहा कि, यदि ऐसा ही है तो हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गाय वहीं चरती है, वहां स्थित पेड़-पौधों की वजह से बारिश होती है। श्रीकृष्ण की बात से सहमत होकर सभी गोकुलवासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा करना आरम्भ कर दिया।

यह देखकर देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और गोकुल पर मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। इतनी बारिश देखकर गोकुलवासी डर गए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी अंगुली पर उठा लिया और समस्त गोकुलवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। निरंतर 7 दिन की मूसलाधार बारिश के बीच भगवान कृष्ण छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाए रहे। इसके बाद देव इंद्र को अपनी गलती का अहसास हुआ कि वह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण से मुकाबला कर रहे थे। तब इंद्र देव ने भगवान कृष्ण से क्षमा मांगी और स्वयं उनका पूजन कर उन्हें भोग लगाया।

क्यों मनाते हैं अन्नकूट?

सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाए रहे कृष्ण इस दौरान भूखे और प्यासे रहे थे। हालात शांत होने के बाद गोकुलवासियों को इस बात का अहसास हुआ। उन्होंने यशोदा मां से पूजा कि कृष्ण क्या-क्या और कब-कब खाते हैं, तो उन्होंने बताया कि वो लला को आठ बार खिलाती हैं। इस तरह दिन में आठ बार और सात दिन के हिसाब से गुकुल वासियों से उनके लिए 56 प्रकार के भोग बनाए और उन्हें अर्पित किए। इसलिए भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग चढ़ाया जाता है।

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