Apara Ekadashi 2026: आने वाली है मई की पहली एकादशी, जानें इसकी तारीख, मुहूर्त और इस व्रत को करने के लाभ

Apara Ekadashi 2026: हिंदू धर्म एकादशी व्रत अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इन्हीं में से एक है ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए जानें इस व्रत की तारीख और मुहूर्त क्या है? साथ ही, जानें इस व्रत को करने से भक्तों को क्या लाभ मिलते हैं

अपडेटेड May 07, 2026 पर 8:54 PM
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अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

Apara Ekadashi 2026: मई महीने और ज्येष्ठ माह की पहली एकादशी अपरा एकादशी होगी। इसे अजला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी व्रत को करने का भक्तों को अपार पुण्य प्राप्त होता है। अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

इस व्रत को हिंदू धर्म के बेहद महत्वपूर्ण और प्रमुख उपवासों में गिना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे अचूक उपाय माना जाता है। जो भक्त पूरे साल सभी 24 एकादशी तिथि का व्रत करते हैं, भगवान विष्णु की कृपा से उनके सभी कष्ट दूर होते हैं और वैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है। अपरा एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को करने से भक्तों को ढेरों लाभ होते हैं। आइए इनके बारे में जानें

अपरा एकादशी 2026:  

एकादशी तिथि प्रारंभ : 12 मई 2026 को दोपहर 02:52 बजे से।

एकादशी तिथि समाप्त : 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे तक।

व्रत (उदयातिथि): 13 मई 2026 (बुधवार)।


व्रत पारण का समय : 14 मई 2026 को सुबह 05:31 बजे से 08:14 बजे के बीच।

शुभ मुहूर्त : सुबह 05:32 से 08:55 तक और 10:36 से 12:14 तक। शाम को 05:22 से 07:04 तक।

इस व्रत से होते हैं ये लाभ

  • इस व्रत को करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।
  • माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से ब्रह्म हत्या, चोरी, झूठ, छल आदि कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
  • मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और यश प्राप्त होता है।
  • व्रत रखने से शरीर और मन शुद्ध होता है, जिससे शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है।
  • अपरा एकादशी व्रत करने से कर्ज, आर्थिक संकट और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। यह व्रत कुंडली के नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को भी कम करता है।
  • जीवन में आने वाली विभिन्न प्रकार की बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  • इस व्रत के प्रभाव से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
  • जो व्यक्ति श्रद्धा से एकादशी व्रत करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो सकता है। भगवान विष्णु इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं।

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