Bada Mangal 2026 Upay: हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना ज्येष्ठ कल से शुरू हो रहा है। इस साल इस माह को धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने में अधिक मास लग रहा है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्य मना होते हैं। ज्येष्ठ माह में अधिक मास का दुर्लभ संयोग तकरीबन 19 साल के बाद बन रहा है। इस माह के मंगलवार का बहुत खास स्थान होता है। मंगलवार का दिन पवनपुत्र हनुमान जी को समर्पित है। माना जाता है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार बजरंगबलि को विशेष रूप से प्रिय होते हैं।
दुनियाभर के हनुमान भक्तों के लिए खास बात ये है कि इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगने से यह महीना 29 या 30 दिनों का न होकर तकरीबन 60 दिनों का होगा। साथ ही इसमें 4 या 5 की जगह 8 बड़े मंगल या बुढ़वा मंगल भी आएंगे। ज्येष्ठ के मंगलवार को इसी नाम से जाना जाता है। यह भक्तों के लिए बेहद शुभ अवसर माना जा रहा है। मान्यता है कि इन दिनों हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा करने पर मंगल दोष, शनि कष्ट और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
17 मई से शुरू होगा ज्येष्ठ अधिक मास
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ माह दो मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा, जिसमें 17 मई से अधिक मास की शुरुआत होगी और 15 जून तक रहेगा। चूंकि यह अधिक मास ज्येष्ठ में ही आ रहा है, इसलिए इसे ज्येष्ठ अधिक मास कहा जाएगा। उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि इस बार ज्येष्ठ माह में भक्तों को 8 बड़े मंगल का पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
पहले बड़े मंगल पर करें ये उपाय
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष या मंगल ग्रह नीच या शुत्र क्षेत्र में विराजमान होता है, तो दो कई तरह के कष्ट झेलने पड़ते हैं। उसके साथ दुर्घटना होना, चोट लगना या उसका शत्रु पक्ष हमेशा हावी रहता है। इसलिए आपको हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। पहले बड़े मंगल को मंदिर में जाकर हनुमान जी को चोला चढ़ाएं और घी का दीपक लगाएं। उसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करने से भी मंगल और शनि ग्रह के कारण मिलने वाली पीड़ा कम होती है।
हनुमान जी को क्यों प्रिय है ज्येष्ठ माह?
ज्येष्ठ मास को शास्त्रों में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इसी पावन महीने में भगवान राम और पवन पुत्र हनुमान का मिलन हुआ था, इसलिए यह समय हनुमान जी की भक्ति के लिए खास होता है। भीषण गर्मी में जरूरतमंदों को पानी पिलाना, जगह-जगह प्याऊ लगाना और सेवा भाव रखना महान पुण्य का कार्य माना गया है। इस माह में किया गया दान-पुण्य कई गुना फल देता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।