Basoda 2026: होली के बाद इस दिन खाया जाता है बासी खाना, जानें कब होगा शीतला अष्टमी का व्रत, मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Basoda 2026: हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बासोड़ा या शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है, लोग निरोगी रहते हैं। जानें इस साल बासोड़ा कब होगा

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 5:47 PM
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इस साल शीतला अष्टमी यानी बसौड़ा 11 मार्च को है।

Basoda 2026: होली का त्योहार चैत्र मास के पहले दिन मनाया जाने वाला पहला और प्रमुख त्योहार है। इसके बाद आता है बासोड़ा, जिसे शीतला अष्टमी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। ये पर्व चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन आरोग्य और स्वच्छता की देवी माता शीतला का व्रत और पूजा की जाती है। इस व्रत का एक और सबसे अहम पहलू ये है इस दिन चूल्हा नहीं जलाते हैं और लोग प्रसाद के रूप में बासी खाना खाते हैं। आइए जानें माता शीतला के व्रत से जुड़ी ये परंपरा क्या है और इस साल शीतला अष्टमी का व्रत किस दिन मनाया जाएगा? साथ ही जानें इस व्रत की विधि और महत्व।

कब है शीतला अष्टमी

होली के आठ दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। इस साल शीतला अष्टमी यानी बसौड़ा 11 मार्च को है। दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 11 मार्च को मध्यरात्रि 1 बजकर 54 से होगा और यह 12 मार्च को प्रात: 04:19 बजे तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी या बासोड़ा का पर्व 11 मार्च दिन बुधवार को है।

बसोड़ा पूजन के लिए शुभ मुहूर्त

11 मार्च को सुबह 06:35 बजे से शाम 18:27 बजे तक शीतला माता की पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप शीतला माता की पूजा सकते हैं।

शीतला अष्टमी से जुड़ी परंपराएं


शीतला मां को रोगों से बचाने वाली देवी माना गया है। सबसे खास बात है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता बल्कि, एक दिन पहले बने खाने को खाया जाता है। इसी से देवी की पूजा भी की जाती है।

शीतला माता की पूजा का स्किन इंफेक्शन या चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए खास महत्व बताया जाता है। चूंकि यह समय ठंड के जाने और गर्मी के दस्तक का होता है तो साइंटिफिक रूप से भी इस दिन का महत्व है।

बासोड़ा पर क्यों नहीं जलाते हैं चूल्हा?

बासोड़ा यानि शीतला अष्टमी के दिन लोग अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाते हैं। इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और उनको बासी भोजन का भोग लगाते हैं। बासोड़ा का भोग एक दिन पहले यानि सप्तमी की रात में बनाया जाता है। फिर ठंडा यानि बासी भोग अगले दिन अष्टमी को शीतला माता को अर्पित करते हैं।

कहा जाता है कि माता शीतला को ठंडा भोजन प्रिय है। उनको जो भोग लगाते हैं, वहीं पूरा परिवार खाता है। उस दिन चूल्हा नहीं जलाते हैं क्योंकि ऐसा करने से शीतला माता नाराज हो सकती हैं।

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