Bhadli Navami 2026 Date: कब है भड़ली नवमी और क्यों मनाई जाती है? इस दिन बिना अच्छा मुहूर्त देखे कर सकते हैं कोई भी शुभ कार्य

Bhadli Navami 2026 Date: भड़ली नवमी आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को होती है। इस दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य बिना शुभ मुहूर्त का विचार किए कर सकते हैं। आइए जानें इस साल कब पड़ रही है भड़ली नवमी और इसका क्या महत्व है?

अपडेटेड Jul 18, 2026 पर 2:13 PM
मुख्य रूप से भड़ली नवमी का त्योहार और पूजा 22 जुलाई 2026 को संपन्न की जाएगी।

Bhadli Navami 2026 Date: भड़ली नवमी को भड़रिया नवमी या कंदर्प नवमी भी कहते हैं। यह आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन को अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी के समान ही 'अबूझ मुहूर्त' माना गया है। इसका मतलब यह है कि इस पूरे दिन ग्रह और नक्षत्र की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग या ज्योतिषी से अलग से मुहूर्त निकलवाने की आवश्यकता नहीं होती।

कब मनाई जाएगी भड़ली नवमी 2026?

वैदिक पंचांग के अनुसार तिथियों का समय कुछ इस प्रकार रहेगा:

नवमी तिथि प्रारंभ : 22 जुलाई 2026 को सुबह 05:16 बजे से

नवमी तिथि समाप्त : 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे तक

उदयातिथि के नियमों के अनुसार नवमी तिथि का सूर्योदय 22 जुलाई को हो रहा है, इसलिए मुख्य रूप से भड़ली नवमी का त्योहार और पूजा इसी दिन संपन्न की जाएगी।


भड़ली नवमी 2026 धार्मिक महत्तव

भड़ली नवमी के ठीक दो दिन बाद 'देवशयनी एकादशी' आती है, जिससे चातुर्मास की शुरुआत होती है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते क्योंकि इस दौरान उनका प्रत्यक्ष आशीर्वाद नहीं मिल पाता। इसलिए, भड़ली नवमी को विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए सीजन का आखिरी दिन मानकर धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा, इसके बाद भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए विश्राम अवस्था में चले जाते हैं, इसलिए श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं और आने वाले चार महीनों के लिए भगवान का संरक्षण व आशीर्वाद मांगते हैं। यह दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है। इस वजह से तांत्रिक और आध्यात्मिक साधना करने वाले लोगों के लिए मां दुर्गा (शक्ति) की पूजा करने और हवन अनुष्ठान संपन्न करने के लिहाज से यह बेहद पवित्र तिथि मानी जाती है।

इस दिन से करना माना जाता है शुभ

  • गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन होने के कारण इस दिन कन्या पूजन करना और गरीबों को दान देना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • यदि किसी के विवाह में रुकावटें आ रही हों, तो भड़ली नवमी के अबूझ मुहूर्त का लाभ उठाकर विवाह संपन्न कराया जाता है।
  • नया वाहन खरीदना, सोने-चांदी की खरीदारी करना या नए घर में प्रवेश करने के लिए भी लोग इस दिन को चुनते हैं।

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