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Bhadrapada Teej Chaturthi Vrat 2026: अगस्त में इस तारीख को एक साथ होंगे 3 व्रत, जानिए तारीख, मुहूर्त और तीनों व्रतों के बारे में सबकुछ

Bhadrapada Teej Chaturthi Vrat 2026: 29 अगस्त से भाद्रपद का महीना शुरू हो चुका है। इस बार भाद्रपद में आने वाले कई प्रमुख व्रत एक साथ करने का दुर्लभ संयोग बन रहा है। आइए जानें कौन से हैं ये तीन व्रत, इनके लिए जरूरी शुभ मुहूर्त और व्रतों के बारे में सभी अहम जानकारी

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 30, 2026 पर 7:00 AM
Bhadrapada Teej Chaturthi Vrat 2026: अगस्त में इस तारीख को एक साथ होंगे 3 व्रत, जानिए तारीख, मुहूर्त और तीनों व्रतों के बारे में सबकुछ
31 अगस्त को कजरी तीज और बहुला चौथ के साथ ही हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

Bhadrapada Teej Chaturthi Vrat 2026: भाद्रपद हिंदू कैलेंडर का छठा महीना है। 28 अगस्त को रक्षा बंधन के पर्व के साथ सावन का महीना समाप्त हो चुका है और भाद्रपद का माह शुरू हो चुका है। इस माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया और चतुर्थी तिथि को कजरी तीज और बहुला चौथ के साथ ही हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इस साल यह तीनों व्रत एक साथ एक ही दिन किए जाएंगे। तीन व्रतों का एक साथ महासंयोग 31 अगस्त को बन रहा है। इस दिन कजरी तीज और बहुला चौथ के साथ ही हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी रखा जाएगा।

कैसे बना 31 अगस्त को दुर्लभ संयोग

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि 30 अगस्त, रविवार को सुबह 9.38 बजे शुरू होगी और 31 अगस्त, सोमवार को सुबह 8.52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त को करना शास्त्र सम्मत होगा। वहीं, भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी तिथि के दिन बहुला चतुर्थी का व्रत करने वाली माताएं शाम को चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। चतुर्थी तिथि 31 अगस्त को सुबह 8.53 बजे शुरू होकर 01 सितंबर, मंगलवार, को सुबह 07.42 बजे समाप्त होगी। ऐसे में, चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन का संयोग 31 अगस्त को बन मिल रहा है। इसलिए बहुला चौथ और हेरम्ब संकष्टि चतुर्थी व्रत भी इस दिन किया जाएगा।

व्रत का महत्व

कजरी तीज : सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

बहुला चौथ : संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए भगवान श्रीकृष्ण, श्रीगणेश और गौ माता (गाय) की पूजा कर व्रत रखा जाता है।

हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी : विघ्नहर्ता भगवान गणेश के हेरम्ब स्वरूप की पूजा की जाती है और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

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