Budh Pradosh Vrat 2025: आज इस शुभ मुहूर्त में की जाएगी भगवान भोले नाथ की पूजा

Budh Pradosh Vrat 2025 धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव की उपासना से वह प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। प्रदोष व्रत जब बुधवार को पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। यह संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि की कामना के लिए उत्तम माना जाता है।

अपडेटेड Aug 20, 2025 पर 12:02 PM
एक साल में 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं और हर दिन होने वाले व्रत का महत्व अलग होता है।

Budh Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है। यह व्रत प्रत्येक हिंदू मास के दोनों पक्ष की त्रयोदशी यानी 13 तारीख को किया जाता है। इस दिन भक्त विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करते हैं व्रत करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूरी आस्था के साथ भगवान शिव की उपासना से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं। प्रदोष व्रत जब बुधवार के दिन पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि की कामना के लिए उत्तम माना जाता है।

एक साल में आते हैं 24 प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए किया जाता है। पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत आते हैं। इस माह यानी भाद्रपद माह का प्रदोष व्रत आज 20 अगस्त को किया जा रहा है। आज बुधवार होने की वजह से इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हफ्ते के हर दिन पर होने वाले प्रदोष व्रत का महत्व अलग-अलग होता है। बुधवार का प्रदोष संतान प्राप्ति या संतान की खुशहाली के लिए किया जाता है।

  • तिथि प्रारंभ: 20 अगस्त 2025, बुधवार को दोपहर 1:58 बजे
  • तिथि समाप्ति: 21 अगस्त 2025, गुरुवार को दोपहर 12:44 बजे
  • पूजा का समय (प्रदोष काल): शाम 06.56 बजे से 09.07 बजे तक

पूजन सामग्री


प्रदोष व्रत में यहां बताई जा रही पूजा सामग्री का विशेष महत्व है। इसमें ज्यादातर सामान महादेव की पूजा के जैसा ही है। धूप, दीप, घी, सफेद पुष्प व माला, आंकड़े का फूल, सफेद वस्त्र, सफेद मिठाई, चंदन, जल भरा कलश, कपूर, आरती थाली, बेल-पत्र, धतूरा, भांग, आम की लकड़ी और हवन सामग्री।

व्रत व पूजा विधि

सुबह स्नान करने के बाद भोलेनाथ का ध्यान करें।

पूरे दिन "ॐ नमः शिवाय" पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें।

प्रदोष काल में फिर से स्नान कर सफेद वस्त्र धारण करें।

पूजा की जगह साफ करें और उसे यथाशक्ति सजाकर पांच रंगों की रंगोली बनाएं।

कलश में जल भरकर स्थापित करें और कुश के आसन पर बैठकर पूजा शुरू करें

शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प और चंदन अर्पित करें।

“ॐ नमः शिवाय” का उच्चारण करते हुए शिवजी का ध्यान करें।

शिव चालिसा का पाठ करें और आरती करें।

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