Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा की आराधना के दिन 19 मार्च से शुरू, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और व्रत के नियम

Chaitra Navratri 2026: होली के पर्व के साथ चैत्र का महीना शुरू हो जाएगा। इसी माह में मां दुर्गा की आराधना का मौका फिर से भक्तों को मिलेगा चैत्र नवरात्र में। इसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होगी। आइए जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम क्या होंगे

अपडेटेड Feb 28, 2026 पर 6:15 PM
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ये नवरात्रि मां दुर्गा की भक्ति के साथ-साथ हिंदू नर्व वर्ष की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। मां दुर्गा की आराधना को समर्पित ये नौ दिन हिंदू कैलेंडर में विशेष स्थान रखते हैं। ये नवरात्रि मां दुर्गा की भक्ति के साथ-साथ हिंदू नर्व वर्ष की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही इसे गर्मियों के मौसम के आने का भी संकेत माना जाता है। इसे वसंत नवरात्रि भी कहते हैं, क्योंकि यह वसंत ऋतु की शुरुआत में आता है। इसलिए यह नई शुरुआत, विकास और सकारात्मकता का प्रतीक है।

देवी दुर्गा के नौ दिव्य रूपों को समर्पित, नौ दिन का यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व राम नवमी के साथ खत्म होता है, जिसमें भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इन नौ दिनों में भक्त अपनी क्षमता और सामर्थ्य अनुसार नौ दिन या पहली और आखिरी तिथि का उपवास करते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 शुरू होने की तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि गुरुवार, 19 मार्च, 2026 को चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ शुरू होगी। यह त्योहार नौ दिनों तक चलेगा और 27 मार्च, 2026 को राम नवमी के साथ खत्म होगा।

कलश स्थापना 2026: शुभ मुहूर्त

घटस्थापना नवरात्रि की शुरुआत के सबसे जरूरी नियमों में से एक है। यह कलश दिव्य ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।


19 मार्च, 2026 के लिए शुभ समय 

मुख्य मुहूर्त : सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक): दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक

प्रतिपदा तिथि शुरू : सुबह 6:52 बजे

देवी के इन नौ रूपों की होती है पूजा

भक्त सेहत, खुशहाली और सुरक्षा का आशीर्वाद पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और रोज आरती करते हैं। चैत्र नवरात्रि का हर दिन दुर्गा के एक अलग रूप को समर्पित है, जिन्हें एक साथ नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है:

  • शैलपुत्री
  • ब्रह्मचारिणी
  • चंद्रघंटा
  • कुष्मांडा
  • स्कंदमाता
  • कात्यायनी
  • कालरात्रि
  • महागौरी
  • सिद्धिदात्री
  • व्रत के नियम

नवरात्रि के नौ दिनों में कई भक्त सख्त सात्विक व्रत रखते हैं। इस अवधि में ये काम करते हैं

  • अनाज, प्याज और लहसुन से परहेज करना
  • फल, दूध, कुट्टू, सिंघाड़ा और साबूदाना खाना
  • ब्रह्मचर्य और अच्छे विचार बनाए रखना
  • रोज नहाना और साफ कपड़े पहनना
  • व्रत के दौरान बाल कटवाने और तेल लगाने से बचना

चैत्र नवरात्रि पूजा विधि

  • घर में पूजा की जगह को साफ और शुद्ध करना
  • पानी और जौ के बीजों से भरा कलश स्थापित करना
  • कलश के ऊपर नारियल रखना
  • रोज फूल, फल और प्रसाद चढ़ाना
  • दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का जाप करना
  • कपूर से आरती करना
  • आखिरी दिन कलश विसर्जित करना

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