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Devshayani Ekadashi 2026: आज देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ जरूर करें तुलसी की पूजा, जानें विधि और महत्व

Devshayani Ekadashi 2026: आज देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में तुलसी की पूजा करने और उनके पास दीपक जलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक खुशहाली बनी रहती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 25, 2026 पर 11:53 AM
Devshayani Ekadashi 2026: आज देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ जरूर करें तुलसी की पूजा, जानें विधि और महत्व
देवशयनी एकादशी पर तुलसी की पूजा करने और दीपक जलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का होना अनिवार्य माना जाता है। यही वजह है कि भगवान विष्णु का भोग तुलसी दल के बिना अपूर्ण माना जाता है। तुलसी को विष्णुप्रिया भी कहते है। आज आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जा रहा है। आज से भगवान विष्णु पाताल लोक में चार माह के लिए शयन करेंगे और चतुर्मास की शुरुआत होगी।

यह समय धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयन काल शुरू होने से पहले तुलसी माता की पूजा करने और उनके समीप दीपक जलाने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इससे घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक खुशहाली बनी रहती है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का समय चतुर्मास कहलाता है।

चतुर्मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। सनातन परंपरा में तुलसी जी को विष्णुप्रिया माना गया है, यानी वे भगवान श्रीहरि को अत्यंत प्रिय हैं। इसी वजह से देवशयनी एकादशी पर तुलसी पूजन का विशेष महत्व होता है। इसके पीछे के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक कारण निम्नलिखित हैं :

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु तुलसी दल के बिना कोई भी भोग या पूजा स्वीकार नहीं करते। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद बनाए रखने के लिए तुलसी जी का अर्पण व पूजन अनिवार्य माना जाता है।
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