Ganesh Chaturthi 2026 Sthapana Vidhi: सभी देवों में प्रथम पूज्य और ऋद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश आज, यानी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को अपने भक्तों के बीच पधार रहे हैं। आज से लेकर अगले 10 दिनों तक बप्पा यानी श्री गणेश धरती पर विराजेंगे और अनंत चतुर्दशी के दिन वापस अपने लोक चले जाएंगे। महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में आज से गणेश उत्सव की शुरुआत हो रही है। भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ शुभ मुहूर्त में और संपूर्ण विधि से घरों और पंडालों में गणेश भगवान की मूर्ति स्थापित करेंगे। मंत्रों से उनका स्वागत करेंगे और उनके प्रिय भोग अर्पित करेंगे। आइए जानें आज के दिन भगवान गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? किस विधि से उनकी स्थापना की जाए?
गणेश चतुर्थी 2026 स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे
गणेश चतुर्थी तिथि समाप्त : 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे
गणपति स्थापना और पूजा का मुहूर्त : सुबह 11:02 बजे से दोपहर 01:31 बजे तक
गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ कर गंगा जल छिड़कें। पूजा स्थान पर एक साफ चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद उस पर थोड़े अक्षत यानी चावल रखें। इसके बाद गणपति बप्पा की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। प्रतिमा का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव कर प्रतिमा की शुद्धि करें।
अब गणेश प्रतिमा के पास जल से भरा एक कलश रखें। इसमें आम के पत्ते, अक्षत, सिक्का और सुपारी डालें। कलश पर मौली बांधें। इसके ऊपर नारियल रखें। अब घी का दीपक जलाएं। गणपति बप्पा और कलश पर रोली या चंदन से तिलक करें। इसके बाद भगवान को फूल, दूर्वा और अक्षत अर्पित करें। गणपति जी को मोदक, लड्डू, फल, मिठाई और अन्य पसंदीदा चीजों का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद गणेश जी की आरती करें। अंत में हाथ जोड़कर बप्पा से घर-परिवार के सभी विघ्न दूर करने और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। जितने दिनों तक घर में गणपति की प्रतिमा स्थापित रहे, उतने दिनों तक सुबह और शाम पूजा करें। भगवान को भोग लगाएं। आरती करें और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करें।
आज के दिन बप्पा को इन चीजों का लगाएं भोग
भगवान गणेश को मोदक, बेसन के लड्डू। तिल और गुड़ के लड्डू। सूजी का हलवा, पंचामृत, नारियल के लड्डू, केसरिया खीर और मौसमी फल का भोग लगाया जा सकता है। भोग लगाते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान को भोग अर्पित करें।
गणपति स्थापना के प्रमुख मंत्र
ॐ गं गणपतये सर्व कार्य सिद्धि कुरु कुरु स्वाहा॥
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ.
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ॐ नमो हेरम्ब मद मोहित मम् संकटान निवारय-निवारय स्वाहा।