Ganga Dussehra 2026: अधिक मास में मनाया जाएगा गंगा दशहरा का पर्व, जानें सही तारीख और महत्व

Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाएगा। आइए जानें इसकी सही तारीख क्या है और गंगा दशहरा पर्व का क्या महत्व है

अपडेटेड May 21, 2026 पर 7:12 PM
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ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को धरती पर गंगा प्रवाहित हुई थीं।

Ganga Dussehra 2026: पतित पावनी मां गंगा के धरती पर प्रवाहित होने के प्रतीक के रूप में गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम के पूर्वज भगीरथ ने अपने कुल के लोगों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के लिए मां गंगा का धरती पर आने के लिए आह्वान किया था। इसके लिए उन्होंने घोर तपस्या की और ब्रह्मा जी के आशीर्वाद से गंगा मां को धरती पर लाने में सफल रहे। लेकिन उनका वेग इतना अधिक था कि धरती उसे संभाल नहीं पा रही थी। इसलिए गंगा मां जब स्वर्ग से धरती पर उतरीं तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया था। इसके बाद ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को उन्होंने धरती पर गंगा को प्रवाहित किया था।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है। इसलिए धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में गंगा दशहरा का पर्व अधिक मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाएगा। इस साल गंगा दशहरा की सही तारीख को लेकर लोगों में थोड़ा भ्रम है कि यह 25 मई को है या 26 मई को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गंगा दशहरा 2026 कब है?

इस साल गंगा दशहरा की सही तारीख को लेकर लोगों में भ्रम देखने को मिल रहा है। ऐसे में पंचांग से समझना चाहिए कि इस पर्व की सही तारीख क्या होगा। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 25 मई 2026 को सुबह 4 बजकर 28 मिनट पर होगी और समापन 26 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर गंगा दशहरा का पर्व 25 मई 2026, सोमवार को मनाया जाएगा।

गंगा स्नान का मुहूर्त

गंगा दशहरा पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन सुबह 4 बजकर 40 मिनट से लेकर 5 बजकर 23 मिनट तक का समय स्नान के लिए सबसे सही रहेगा। इसके अलावा, जो लोग सुबह स्नान नहीं कर पाएं, वे दोपहर में 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक भी स्नान और दान कर सकते हैं। अगर गंगा घाट जाना संभव न हो, तो घर में स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना गया है।


गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व

धार्मिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, ताकि उनके पूर्वजों को मोक्ष मिल सके। दशहरा शब्द का अर्थ दस पापों का नाश माना गया है। इसलिए माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं।

गंगा दशहरा पर करें सत्तू, गुड़ और जल का दान

मां गंगा की पूजा करें, दीप जलाएं और जरूरतमंद लोगों को दान दें। इस दिन जल, वस्त्र, फल, सत्तू और गुड़ दान करना विशेष फलदायी माना गया है।

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