Surya Grahan 2026: दुर्लभ होगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, 12 अगस्त को 7 घंटे 21 मिनट लंबे ग्रहण में बना रहेगा राहू-केतु का असर

Surya Grahan 2026: साल 2026 का अंतिम और दुर्लभ सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। इस ग्रहण की अवधि 7 घंटे 21 मिनट की होगी और इस दौरान राहू और केतु का असर भी बना रहेगा। ग्रहणें के दौरान चतुर्ग्रही और नंवपंचम योग बनेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं नजर आएगा

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 7:37 PM
यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार के दिन सावन माह की अमावस्या तिथि को कर्क राशि में होगा।

Surya Grahan 2026: सूर्य और चंद्र ग्रहण खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्येतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण होते हैं। इनमें से साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरमी में लगा था, जबकि चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा को होली के त्योहार पर लगा था। ऐसे में अब साल के दूसरे सूर्य ग्रहण का समय पास आ रहा है। इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण बेहद खास और दुर्लभ होगा। यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार के दिन लगेगा, जो एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इस ग्रहण की अवधि 7 घंटे 21 मिनट की होगी।

ये सूर्य ग्रहण सावन माह की अमावस्या तिथि को कर्क राशि में होगा। भारतीय समयानुसार, साल का दूसरा व आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 09 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 की सुबह 04 बजकर 25 मिनट तक लगेगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, और उत्तरी गोलार्ध के क्षेत्रों में दिखाई देगा। इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा। साल का आखिरी सूर्य ग्रहण मिथुन, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए शुभ रहने वाला है। इन राशि के लोगों को करियर में बेहतरीन अवसर, व्यापार में वृद्धि, लंबे समय से फंसे हुए धन की वापसी और कार्यस्थल पर उच्च पद-प्रतिष्ठा व सम्मान मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं।

ग्रहण के दौरान चतुर्ग्रही और नवपंचम योग का दुर्लभ संयोग

12 अगस्त को लगने वाले साल के अंतिम सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक देगा। यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। इस खास मौके पर कर्क में चार ग्रहों सूर्य, चंद्रमा, बुध और बृहस्पति की उपस्थिति चतुर्ग्रही योग बनाएगी। इस तरह से यह दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण चतुर्ग्रही योग में लगेगा। इस सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभाव का असर 6 महीने तक देखने को मिलेगा।

ज्योतिषीय नजरिए से 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण पर दो अलग-अलग तरह के नवपंचम योग का संयोग भी बनेगा। ज्योतिष में सूर्य ग्रहण के साथ नवपंचम योग का बनना शुभ संकेत नहीं माना जाता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण के साथ-साथ नवपंचम योग का बनना कुछ राशियों के लिए अच्छा नहीं रहेगा।

7 घंटे से अधिक समय तक राहु-केतु का प्रभाव


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहु और केतु की वजह से सूर्य ग्रहण लगता है। यह सूर्य ग्रहण 7 घंटे 21 मिनट तक रहेगा। इस वजह से सूर्य पर राहु-केतु का प्रभाव 7 घंटे से अधिक समय तक रहेगा।

अंतिम सूर्य ग्रहण 2026 सूतक काल

सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण समय से 12 घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाता है। सूतक काल में कोई भी शुभ कार्य, स्नान, दान, सोना, खाना आदि नहीं करते हैं। लेकिन जिस स्थान पर सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देता है, वहां पर सूतक काल मान्य नहीं होता है। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इस वजह से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।

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