Ganga Dussehra 2026: इस बार अधिक मास में मनाया जाएगा गंगा दशहरा, जानें इस महान पर्व की तारीख, मुहूर्त और इस दिन किन चीजों का करें दान

Ganga Dussehra 2026: गंगा नदी को हिंदू धर्म में मां का दर्जा देते हैं। गंगा दशहरा के दिन वह भगवान शिव की जटाओं से धरती पर प्रवाहित हुई थीं। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल इसे अधिक मास में मनाया जाएगा। जानें इसकी तारीख, मुहूर्त और इस दिन क्या दान करना चाहिए

अपडेटेड May 18, 2026 पर 6:13 PM
Story continues below Advertisement
इस साल गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ अधिक मास में मनाया जाएगा।

Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा का पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व ज्येष्ठ अधिक मास में मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा भगीरथ कठोर तप के बाद गंगा नदी को धरती पर जाए थे। लेकिन इनका वेग इतना शक्तिशाली था कि इससे समस्त पृथ्वी नष्ट हो जाती। इसलिए इन्हें सबसे पहले विषधर शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया। इसके बाद उन्होंने ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपनी जटाओं से धरती पर प्रवाहित किया।

हिंदू धर्म में इस पर्व को अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से मनाया जाता है। इस पर्व पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस वर्ष गंगा दशहरा की तिथि और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त।

गंगा दशहरा तिथि

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि आरंभ : 25 मई, प्रातः 4:30 मिनट

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि समाप्त : 26 मई, प्रातः 05:10 मिनट

उदयातिथि के अनुसार गंगा दशहरा 25 मई 2026 को मनाया जाएगा।


गंगा दशहरा स्नान-दान मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : 25 मई, प्रातः 4:30 मिनट से 05:30 मिनट तक

अमृत चौघड़िया : प्रातः 05:25 मिनट से प्रातः 07: 08 मिनट तक

शुभ चौघड़िया : प्रातः 08"51 मिनट से 10:34 मिनट तक

पौराणिक कथा और महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों (राजा सगर के 60,000 पुत्रों) की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी।

चूंकि गंगा का वेग अत्यधिक तीव्र था जिससे पृथ्वी नष्ट हो सकती थी, इसलिए भगवान शिव ने गंगा के वेग को नियंत्रित करने के लिए उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया। इसके बाद गंगा जी पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं और भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार किया। इसी कारण गंगा को 'भागीरथी' भी कहा जाता है।

पूजा विधि और परंपराएं

इस दिन हरिद्वार, वाराणसी (काशी), ऋषिकेश और प्रयागराज जैसे तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। यदि गंगा तट पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जाता है।

इस पर्व में मां गंगा को 10 प्रकार के फूल, 10 दीपक, 10 फल और 10 तरह के नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है। दान करते समय भी 10 ब्राह्मणों को या 10 प्रकार की वस्तुएं दान करना शुभ माना जाता है।

शाम के समय गंगा घाटों पर भव्य 'गंगा आरती' की जाती है और नदियों में दीप प्रवाहित (दीपदान) किए जाते हैं, जो देखने में अत्यंत अलौकिक लगता है।

गंगा दशहरा पर करें इन चीजों का दान

इस दिन भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए सत्तू, मटका (घड़ा), पंखा, तरबूज, और ठंडे शरबत (लस्सी/शिकंजी) का दान करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है।

Adhik Maas 2026: आज से शुरू हो रहे अधिक मास में लगेगा मांगलिक कार्यों पर ब्रेक, ऐसा दुर्लभ संयोग 2037 तक फिर नहीं होगा

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।