Ganga Saptami 2026 Date: पतित पावनी मां गंगा को समर्पित है ये दिन, जानें कब है गंगा सप्तमी और क्या है शुभ मुहूर्त

Ganga Saptami 2026 Date: गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां गंगा लोक कल्याण के लिए धरती पर आई थीं। ये पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। आइए जानें इस साल ये पर्व किस दिन मनाया जाएगा

अपडेटेड Apr 21, 2026 पर 7:00 AM
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गंगा सप्तमी का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को होता है।

Ganga Saptami 2026 Date: गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से धरती पर मानव कल्याण के लिए आई थीं। गोमुख से निकलकर पहाड़ों के रास्ते होती हुई समतल क्षेत्र में पहुंची थी। गंगा सप्तमी का पर्व हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा सप्तमी के दिन हरिद्वार हर की पौड़ी पर विशेष समय गंगा स्नान करने का सबसे अधिक शुभ फल प्राप्त होता है। इस दिन हरिद्वार हर की पौड़ी पर दीपदान के साथ गंगा आरती भी विशेष रूप से की जाती है। गंगा सप्तमी पर गंगा स्नान को अत्यंत शुभ फलदायी बताया गया है। इस दिन दान का भी महत्व होता है।

गंगा सप्तमी 2026 कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। दृक पंचांग के मुताबिक, साल 2026 में यह सप्तमी तिथि 22 अप्रैल की रात 10 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी और 23 अप्रैल की रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। चूंकि सनातन धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए गंगा सप्तमी 23 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।

हरिद्वार में करें गंगा स्नान

धार्मिक ग्रंथो के अनुसार गंगा सप्तमी के दिन हर की पौड़ी ब्रह्मकुंड का घाट अमृत तुल्य हो जाता है। इस दिन गंगा स्नान करने पर सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 23 अप्रैल गुरुवार को ब्रह्म मुहूर्त 4:02 से 5:13 के मध्य यहां स्नान करने पर शुभ फल की प्राप्ति होगी।

क्यों मनाते हैं गंगा सप्तमी?


मान्यता है कि इस दिन मां गंगा धरती पर पुनः प्रकट हुई थीं। राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने पृथ्वी पर अवतरण किया और उनके पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया। पौराणिक कथा के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन मां गंगा पहली बार धरती पर अवतरित हुई थीं। उस समय उनका प्रवाह संभालना मुश्किल हो गया था। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर उनके वेग को नियंत्रित किया। इसके बाद, भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं से मां गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया, ताकि भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष मिल सके। इसी पावन घटना की स्मृति में हर साल गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

गंगा सप्तमी की पूजा विधि

इस दिन प्रातःकाल गंगा स्नान या घर में गंगाजल से स्नान करें। इसके बाद मां गंगा, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करें। अब दीप, धूप, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। इस दिन गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।

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