Hanuman Jayanti 2025: रामचरितमानस की ये चौपाइयां बदल देंगी किस्मत, हनुमान जयंती पर जरूर करें पाठ

Hanuman Jayanti 2025: हनुमान जयंती 12 अप्रैल शनिवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए प्रभु श्रीराम की पूजा करनी चाहिए। राम जी जिन पर कृपा करते हैं, उन्हें हनुमान जी का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त होता है। आइए जानें, रामचरितमानस की कौन-सी चौपाइयां मनोकामना पूर्ति और संकट निवारण में सहायक हैं

अपडेटेड Apr 12, 2025 पर 8:16 AM
Story continues below Advertisement
Hanuman Jayanti 2025: हनुमान जयंती का पावन पर्व 12 अप्रैल, शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा।

इस वर्ष हनुमान जयंती का पावन पर्व 12 अप्रैल, शनिवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। ये पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जिसे श्रीहनुमान जी का जन्मदिन माना जाता है। भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त, माता अंजनी और केसरीनंदन श्रीहनुमान को बल, बुद्धि, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। हनुमान जयंती पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ, सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और हनुमान जी को चोला, सिंदूर, गुड़-चने का भोग अर्पित करते हैं।

मान्यता है कि हनुमान जी की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और सफलता के मार्ग खुलते हैं। यह दिन प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति में लीन होने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।

हनुमान जी को प्रसन्न करता है श्रीराम की भक्ति


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी अपनी पूजा से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना कि प्रभु श्रीराम के नाम, गुणगान और भक्ति से होते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रीराम की सच्चे मन से पूजा करता है, उसे हनुमान जी का आशीर्वाद स्वतः प्राप्त होता है। साथ ही भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं, क्योंकि वो स्वयं राम नाम का ध्यान करते हैं।

संकटों से छुटकारा दिलाने वाली प्रभावशाली 7 चौपाइयां

प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥

गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई॥

धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता। तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥

हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा। तेहि समेत नृप दल मद गंजा॥

राम बिमुख संपति प्रभुताई। जाइ रही पाई बिनु पाई॥

सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं। बरषि गएँ पुनि तबहिं सुखाहीं॥

जामवंत कह सुनु रघुराया। जा पर नाथ करहु तुम्ह दाया॥

ताहि सदा सुभ कुसल निरंतर। सुर नर मुनि प्रसन्न ता ऊपर॥

ताकर दूत अनल जेहिं सिरिजा। जरा न सो तेहि कारन गिरिजा॥

उलटि पलटि लंका सब जारी। कूदि परा पुनि सिंधु मझारी॥

निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा॥

भेद लेन पठवा दससीसा। तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा॥

कहेहु तात अस मोर प्रनामा। सब प्रकार प्रभु पूरनकामा॥

दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ सम संकट भारी॥

सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रेष्ठ चौपाई

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।

करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥

एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली।

तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

Akshaya Tritiya 2025: आखिर क्यों अक्षय तृतीया को गोल्ड, घर और कार खरीदने के लिए माना जाता है शुभ? नाम में छुपी है कहानी

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।