Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज महिलाओं के लिए एक विशेष पर्व है, जिसे पति की लंबी आयु, वैवाहिक सुख और समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दिन व्रती निर्जला व्रत रखती हैं, यानी 24 घंटे तक अन्न और जल का त्याग करती हैं। व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर होती है। पूजा स्थल पर माता पार्वती और भगवान शिव की मूर्तियों की स्थापना कर फूल, फल, दीप, धूप, अक्षत और नैवेद्य से पूजा की जाती है। दिनभर कथा और आरती से व्रती अपनी भक्ति प्रकट करती हैं।
मुख्य मुहूर्त: सुबह 5:56 बजे से 8:31 बजे तक, कुल 2 घंटे 35 मिनट का समय।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:31 बजे से 3:23 बजे तक।
व्रत का पारण अगले दिन, 27 अगस्त को सुबह 5:57 बजे किया जाएगा।
हरतालिका तीज व्रत की विधि
हरतालिका तीज का व्रत सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि इसे निर्जला रखा जाता है। ब्रह्म मुहूर्त से व्रत प्रारंभ करें। सबसे पहले स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। इसके बाद मिट्टी की भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजा स्थल पर स्थापित करें।
पूजन के दौरान फूल, फल, नैवेद्य, दीप, धूप और अन्य सामग्री का उपयोग करें। माता-पिता और भगवान शिव की आरती करें और उनकी कथा सुनें। शाम को पुनः पूजा करके अर्घ्य अर्पित करें।
हरतालिका तीज पूजन सामग्री
हरतालिका तीज के पूजन में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग किया जाता है। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में पीले रंग का वस्त्र, केले का पत्ता, रोली, जनेऊ, सुपारी, शमी पत्र, बेलपत्र, कलश, अक्षत, दूर्वा, घी, कपूर, दही और गंगाजल शामिल होते हैं। इसके अलावा, माता पार्वती के श्रृंगार के लिए सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और कुमकुम का भी प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार, हरतालिका तीज पर विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से वैवाहिक सुख और पति की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है।
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