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Hindu Navvarsh 2026: खास संयोगों में शुरू होगा नया साल, लेकिन माता की पालकी और रौद्र संवत्सर ने बढ़ाई चिंता

Hindu Navvarsh 2026: हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है। इस दिन नवरात्रि का पहला दिन भी होता है। इस साल हिंदू नववर्ष की शुरुआत में दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं, लेकिन माता का पालकी पर आगमन और रौद्र संवत्सर चिंता बढ़ा रहे हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 16, 2026 पर 9:28 PM
Hindu Navvarsh 2026: खास संयोगों में शुरू होगा नया साल, लेकिन माता की पालकी और रौद्र संवत्सर ने बढ़ाई चिंता
इस साल नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होगी।

Hindu Navvarsh 2026: हिंदू नववर्ष की शुरुआत अंग्रेजी कैलेंडर की तरह 1 जनवरी से नहीं होती है। हिंदू धर्म के सभी पव, व्रत और उत्सव हिंदू कैलेंडर यानी संवत्सर के अनुसार मनाए जाते हैं, जो चंद्र तिथियों से तय होता है। इसकी शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। संवत्सर बदलता है और इसे ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस साल नव संवत्सर विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होगी। इस साल के संवत्सर को रौद्र संवत कहा जा रहा है। इसके साथ कई और दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं, जिनमें से कुछ चिंता बढ़ाने वाले भी हैं।

ग्रहों की स्थिति ने बढ़ाई चिंता

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार हिंदू नववर्ष पर ग्रहों की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। एक तो इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी पर हो रहा है, जो शुभ संकेत नहीं है। साथ ही, ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं है। इसके कारण देश-दुनिया में संघर्ष, आर्थिक संकट और राजनीतिक उथल-पुथल के योग बन रहे हैं।

डोली/पालकी में माता का आना शुभ संकेत नहीं

इस बार हिंदू नववर्ष की शुरुआत शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्ध योग में होगी। ऐसा दुर्लभ संयोग 72 साल बाद बन रहा है। खरगोन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. बसंत सोनी ने लोकल 18 से बताया कि इसके साथ एक चिंता की बात भी है कि गुड़ी पड़वा के दिन माता दुर्गा का आगमन पालकी पर हो रहा है, जिसे शुभ संकेत नहीं माना जाता।

हो सकती है राजनीतिक उथल-पुथल

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, नवरात्रि में माता दुर्गा का पालकी पर आगतन अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। उनका कहना है कि ऐसे समय में आर्थिक संकट, संघर्ष और सामाजिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने दावा किया कि इसकी शुरुआती झलक अभी से देखने को मिल रही है, जहां वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी के संकेत दिखाई दे रहे हैं और पेट्रोल, डीजल व गैस जैसी चीजों को लेकर भी कई जगह अस्थिरता देखी जा रही है।

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