Holashtak 2026: 23 या 24 कब से लगेगा होलाष्टक, जानें क्यों माना जाता है इसे खतरनाक और क्यों नहीं होते शुभ काम?

Holashtak 2026: रंगों के पर्व होली से पहले कुछ दिनों की अवधि में शुभ काम नहीं किए जाते हैं। ये होलाष्टक है, जो आठ दिनों का होता है। इसकी शुरुआत होली से आठ दिन पहले होती है। आइए जानें इस साल होलाष्टक कब से लग रहा है और इसे क्यों माना जाता है खतरनाक

अपडेटेड Feb 18, 2026 पर 9:34 PM
Story continues below Advertisement
होली के पर्व से आठ दिन पहले का समय काफी खतरनाक माना जाता है।

Holashtak 2026: रंगो का त्योहार होली, हिंदू धर्म के प्रमुख और बड़े त्योहारों में से एक है। इस पर्व में लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं और गले मिलकर त्योहार की शुभकामनाएं देते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होली के पर्व से आठ दिन पहले का समय काफी खतरनाक माना जाता है। कहते हैं, इस दौरान धरती पर नकारात्मक शक्तियों की ऊर्जा बढ़ जाती है। इसी अवधि को होलाष्टक कहते हैं। यह होली से आठ दिन पहले लगते हैं और इस दौरान शुभ या नया काम नहीं किया जाता है। आइए जानें क्यों होलाष्टक को खतरनाक माना जाता है? इस साल होलाष्टक कब से लग रहा है?

क्यों अच्छा नहीं मानते हैं होलाष्टक?

होलाष्टक का वर्णन पौराणिक कथाओं में मिलता है। इससे जुड़ी कथा के अनुसार, पौराणिक काल में भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका थी। होलाष्टक के इन आठ दिनों में ही प्रहलाद के पिता हिरणकश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को अलग-अलग तरह की यातनाएं दी थीं। अंतिम दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा जिसमें होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद को सुरक्षित बच गए। इसी कारण इन आठ दिनों को शास्त्रों में अच्छा नहीं माना जाता है।

कब से लग रहा होलाष्टक?

हिन्दू पंचांग के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुल शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और इसका समापन फाल्गुल पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ होता है। इस साल होलाष्टक की शुरुआत 23 फरवरी से हो रही है, जो 3 मार्च तक रहेगा। होलिका दहन 2 मार्च की मध्य रात्रि में होगा क्योंकि चंद्रग्रहण के कारण इस बार होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त 2 मार्च को ही मिल रहा है।

होलाष्टक में नहीं होते ये काम


होलाष्टक के आठ दिनों में शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। कई परिवार इस अवधि में नए व्यवसाय की शुरुआत या बड़ी खरीदारी से भी बचते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इस समय किए गए कार्यों का फल उतना अच्छा नहीं मिलता।

लेकिन इन क्षेत्रों में ही रहता होलाष्टक का असर

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर सुभाष पांडेय के अनुसार देश के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहां होलाष्टक का प्रभावि नहीं होता है। उन्होंने लोकल 18 से प्रोफेसर पांडेय ने बताया कि शास्त्रों में वर्णन है कि भारत के पश्चिम हिस्से में ही होलाष्टक लगता है। विपाशा नदी जिसे वर्तमान में व्यास नदी के नाम से जाना जाता है, इसके अलावा इरावती (रावी), सतलज और त्रिपुष्कर नदी के तटीय क्षेत्रों में इसका प्रभाव नहीं पड़ता है। यह सभी नदी पंजाब, गुजरात और अजमेर के आसपास के क्षेत्रों में हैं। इन इलाकों में ही होलाष्टक का दोष लगता है।

यहां नहीं होता असर

होलाष्टक का असर देश के उत्तर और पूर्वोत्तर भाग में बिल्कुल नहीं होता है। यानी होलाष्टक के दिनों में भारत के इन हिस्सों में मांगलिक कार्य हो सकते हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, असम, बिहार सहित अन्य जगहों पर इन दिनों में भी मुहूर्त के हिसाब से मांगलिक कार्य हो सकते हैं।

Falgun month last Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष होगा फाल्गुन का आखिरी प्रदोष व्रत, जानें व्रत की तारीख, समय और पूजा विधि

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।