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Dhanteras 2025: धनतेरस आज, जानें क्या है कुबेर के एक आंख फूटने की कहानी?

Dhanteras 2025: धनतेरस का पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। कहते हैं इस दिन भगवान कुबेर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कुबेर जी की तपस्या और उनकी एक सोने जैसी आंख की रहस्यपूर्ण कहानी, जो समृद्धि और धन की चाबी बताती है?

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 18, 2025 पर 4:37 PM
Dhanteras 2025: धनतेरस आज, जानें क्या है कुबेर के एक आंख फूटने की कहानी?
Dhanteras 2025: कहते हैं कि कुबेर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करने का संकल्प लिया।

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार केवल धन और समृद्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और सौभाग्य लाने वाला भी माना जाता है। धनतेरस पर विशेष रूप से धन के अधिपति और स्वर्ग के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर की पूजा का विधान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुबेर जी यक्षों और धन के स्वामी हैं और उनकी एक आंख सोने की थी। कहते हैं कि कुबेर ने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और इसके परिणामस्वरूप उन्हें धन और यक्षों का स्वामी बनने का वरदान प्राप्त हुआ।

कुबेर जी की ये कथा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि ये हमें समर्पण, भक्ति और धैर्य की सीख भी देती है। धनतेरस पर उनकी पूजा और उनकी कृपा पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।

कुबेर की कठोर तपस्या

कहते हैं कि कुबेर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करने का संकल्प लिया। वे काशी नगरी गए और वहां मन के रत्नमय दीपों से ग्यारह रुद्रों का आह्वान कर साधना में लीन हो गए। कुबेर ने वहां शिवलिंग स्थापित किया और हजारों वर्षों तक भक्ति में लीन रहे। उनकी निष्ठा और तपस्या देखकर शिवजी ने अपनी दिव्य शक्ति उमा के भव्य रूप में कुबेर को दर्शन दिए।

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