Vat Savitri 2025: पति की लंबी उम्र के लिए ऐसे करें वट सावित्री का व्रत, जानिए यहां पूरी जानकारी

Vat Savitri 2025: इस साल वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि, 26 मई सोमवार को मनाया जाएगा। इस व्रत का विशेष महत्व है क्योंकि विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और खुशहाली के लिए इसे श्रद्धा से करती हैं। चलिए, जानते हैं वट सावित्री व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा का सही तरीका

अपडेटेड May 21, 2025 पर 1:18 PM
Vat Savitri 2025: वट सावित्री व्रत की मूल कथा महाभारत काल की पुण्यश्लोक सावित्री से जुड़ी है

वट सावित्री व्रत हिंदू संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिए एक बेहद शुभ और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। ये व्रत सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें पत्नी की तपस्या और निष्ठा से पति को नया जीवन मिलता है। यही कारण है कि हर साल ज्येष्ठ अमावस्या के दिन महिलाएं इस व्रत को पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ करती हैं, ताकि उनके पति की उम्र लंबी हो, जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आए। साल 2025 में वट सावित्री व्रत 26 मई, सोमवार को मनाया जाएगा।

इस दिन महिलाएं वट वृक्ष (बड़ का पेड़) की पूजा करती हैं और व्रत कथा का पाठ करती हैं। इस व्रत का धार्मिक ही नहीं, मानसिक और सांस्कृतिक महत्व भी गहरा है, जो नारी शक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। आइए विस्तार से जानें इसकी तिथि, पूजा विधि और सामग्री।

कब है वट सावित्री व्रत?


पंचांग के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखा जाता है। साल 2025 में अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12:11 बजे शुरू होकर 27 मई रात 8:31 बजे तक रहेगी। चूंकि व्रत उदयातिथि पर रखा जाता है, इसलिए 26 मई को व्रत का दिन माना जाएगा।

क्यों रखा जाता है वट सावित्री व्रत?

वट सावित्री व्रत की मूल कथा महाभारत काल की पुण्यश्लोक सावित्री से जुड़ी है, जिन्होंने अपने पति सत्यवान को यमराज खुद जीवन दिलाया था। इसी श्रद्धा और निष्ठा की प्रतीक ये परंपरा आज भी विवाहित स्त्रियों द्वारा निभाई जाती है।

कैसे करें व्रत की शुरुआत?

दिन की शुरुआत: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें। मानसिक रूप से व्रत का संकल्प लें।

वट वृक्ष की पूजा: सज-धजकर वट वृक्ष के पास जाएं, वहां साफ-सफाई करें और वृक्ष की जड़ों में जल चढ़ाएं।

परिक्रमा और पाठ: धूप-दीप जलाकर वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। इसके बाद वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करें।

भोग और दान: भोग अर्पित करें और जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र का दान करें।

पूजन सामग्री की लिस्ट

पूजन के लिए चाहिए भीगा हुआ काला चना (सत्यवान का प्रतीक), मौसमी फल, अक्षत, गंगाजल, मिट्टी का घड़ा, वट वृक्ष की डाल, सुपारी, सिंदूर, हल्दी, मिठाई और देसी घी। ये सारी सामग्री न सिर्फ प्रतीकात्मक है, बल्कि धार्मिक रूप से भी शुभ मानी जाती है।

इन बातों का जरूर रखें ध्यान

व्रत के दिन किसी से विवाद न करें, न ही किसी का अपमान करें। शुद्ध मन और श्रद्धा से किया गया व्रत ही फलदायी होता है। दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखें और धार्मिक भावना में लीन रहें।

डिस्क्लेमर:  इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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