Jyeshtha Amavasya 2026: ज्येष्ठ अमावस्या की तारीख में नहीं है कोई कंफ्यूजन, जानें तिथि, मुहूर्त और इस दिन के नियम

Jyeshtha Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि भी इनमें से एक है। इस तिथि को लेकर कुछ लोग में भ्रम है, लेकिन पंचांग के अनुसार कंफ्यूजन की गुंजाइश नहीं है। आइए जानें इसकी तिथि, मुहूर्त और ज्येष्ठ अमावस्या के नियम

अपडेटेड May 11, 2026 पर 6:10 PM
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ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर वट सावित्री व्रत किया जाता है और शनि जयंति भी होती है।

Jyeshtha Amavasya 2026: ज्येष्ठ अमावस्या को हिंदू धर्म के पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना जाता है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है, इसलिए इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और पितरों के लिए तर्पण-श्राद्ध करना बहुत शुभ माना जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर कुछ दुर्लभ संयोग हर साल होते हैं। जैसे इसी दिन वट सावित्री व्रत किया जाता है और सूर्य पुत्र शनिदेव की जयंति यानी शनि जयंति भी होती है। लेकिन एक और दुर्लभ संयोग इस दिन के साथ जुड़ रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है। इससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि इसी दिन साल की पहली शनिश्चरी अमावस्या भी मनाई जाएगी। आइए जानें ज्येष्ठ अमावस्या की सही तारीख, मुहूर्त और इस दिन क्या करें और क्या न करें ?

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 तारीख

अमावस्या तिथि प्रारंभ : 16 मई 2026 को सुबह 05:13 बजे।

अमावस्या तिथि समाप्त : 17 मई 2026 को रात 01:33 बजे।

ज्येष्ठ अमावस्या 2026 शुभ मुहूर्त

स्नान-दान का मुहूर्त : सुबह 08:55 से सुबह 10:40 तक का समय विशेष रूप से फलदायी माना गया है।


ज्येष्ठ अमावस्या का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ अमावस्या पर एक साथ कई महत्वपूर्ण उत्सव और अनुष्ठान होते हैं। इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत किया जाता है। यह तिथि पितृ तर्पण के लिए अहम मानी जाती है। इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पवित्र नदियों में स्नान, तर्पण और पिंडदान करने का विधान है। माना जाता है कि इससे पितृदोष कम होता है।

ज्येष्ठ अमावस्या 2026: क्या करें?

दान करें : इस दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काली उड़द, काले तिल, छाता, काले जूते या लोहे के बर्तनों का दान करना अत्यंत शुभ है।

पीपल की पूजा : सुबह जल्दी स्नान करके पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष और शनि दोष शांत होते हैं।

हनुमान चालीसा : शनि के प्रकोप से बचने के लिए हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

परोपकार : काले कुत्ते और कौए को भोजन कराएं। चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालना भी फलदायी होता है।

क्या न करें (Don'ts)

तामसिक भोजन से बचें : इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन बिल्कुल न करें। पूर्ण सात्विकता बनाए रखें।

लोहा न खरीदें : अमावस्या और शनिवार का योग होने के कारण इस दिन घर के लिए नया लोहा या लोहे का सामान खरीदकर न लाएं (दान के लिए खरीद सकते हैं)।

बाल और नाखून न काटें : शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के दिन बाल कटवाना या नाखून काटना वर्जित माना गया है।

विवाद से बचें : घर में बुजुर्गों और जरूरतमंदों का अनादर न करें। इससे शनि देव रुष्ट हो सकते हैं।

सुनसान जगह पर न जाएं : अमावस्या की रात को नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय होती है, इसलिए देर रात सुनसान रास्तों पर जाने से बचें।

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