Kartik Purnima 2025: इस साल 5 नवंबर को मनाई जाएगी देव दीपावली, जानें इस दिन कौन से देवी-देवता की पूजा होगी?

Kartik Purnima 2025: इस साल कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 5 नवंबर 2025 के दिन मनाया जाएगा। इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहता जाता है और ये भी मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर स्वर्ग के सभी देवी-देवता गंगा स्नान करने के लिए धरती पर आते हैं। इसलिए इसे देव दीपावली भी कहते हैं।

अपडेटेड Oct 23, 2025 पर 8:40 PM
कार्तिक पूर्णिमा के दिन कई प्रमुख अनुष्ठान किए जाते हैं और इसे कई नामों से भी जाना जाता है।

Kartik Purnima 2025: कार्तिक पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। इसे हिंदू वर्ष की प्रमुख और सबसे बड़ी पूर्णिमा तिथियों में से एक माना जाता है। इस दिन से कार्तिक का पवित्र और बेहद महत्वपूर्ण माह समाप्त होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन कई प्रमुख अनुष्ठान किए जाते हैं और इसे कई नामों से भी जाना जाता है। इस दिन को शास्त्रों में त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ देवाधिदेव भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इस त्यौहार का महत्व तब और बढ़ जाता है जब यह कृत्तिका नक्षत्र में पड़ता है। इसीलिए इसे महाकार्तिक कहा जाता है।

इसके अलावा इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है और माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वर्ग से देवी-देवता भी गंगा स्नान के लिए धरती पर आते हैं। यही कारण है कि इस दिन देव दीपावली मनाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिखों के पहले धर्म गुरु गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गुरुनानक जयंती पर प्रकाश पर्व मनाया जाता है। इस साल ये पर्व 5 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। आइए जानें इस दिन से जुड़ी अन्य जरूरी बातें

कार्तिक पूर्णिमा कब होगी?

इस साल कार्तिक पूर्णिमा 05 नवंबर को मनाई जाएगी। कार्तिक पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 04 नवंबर 2025 को रात 10:36 बजे होगी और ये अगले दिन 05 नवंबर 2025 को शाम 6:48 मिनट पर समाप्त। उदया तिथि मान्य होने से कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार 5 नवंबर को मनाया जाएगा।

गंगा स्नान और पूजा का शुभ मुहूर्त

गंगा स्नान मुहूर्त- सुबह 04:52 बजे से सुबह 5:44 बजे तक


पूजा का मुहूर्त- सुबह 07:58 बजे से सुबह 09:20 बजे तक

प्रदोषकाल देव दीपावली मुहूर्त- शाम 05:15 बजे से रात 07:5 बजे तक

चंद्रोदय- शाम 5:11 बजे होगा

कार्तिक पूर्णिमा पर होती है त्रिपुरारी की पूजा

लक्ष्मी नारायण और भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस पर विजय प्राप्त की थी। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी दिन अपना पहला मत्स्य अवतार लिया था।

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