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कृष्ण जन्मोत्सव का अनूठा संयोग! इन खास नक्षत्र में करें कान्हा की पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना

इस साल जन्माष्टमी का त्योहार भक्तों के लिए बेहद खास होने वाला है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, इसलिए इन दोनों का साथ आना शुभ माना जाता है। इस मौके पर मथुरा और वृंदावन में कृष्ण जन्मोत्सव की खास रौनक देखने को मिलेगी। मंदिरों में सजावट, भजन-कीर्तन और आधी रात को कान्हा के जन्म की खुशी मनाई जाएगी। भक्त व्रत रखकर भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करेंगे और उनके जन्म का इंतजार करेंगे।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 02, 2026 पर 9:42 AM
कृष्ण जन्मोत्सव का अनूठा संयोग! इन खास नक्षत्र में करें कान्हा की पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना

जन्माष्टमी पर 15 साल बाद बनेगा अष्टमी-रोहिणी का संयोग, जानें क्यों खास है इस बार का कृष्ण जन्मोत्सव

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला खास त्योहार है। हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात के समय रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। यही वजह है कि जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ आना बेहद शुभ माना जाता है। इस बार 2026 में भी ऐसा खास संयोग बन रहा है, जिसकी वजह से कृष्ण भक्तों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।जन्माष्टमी आते ही मथुरा और वृंदावन का माहौल पूरी तरह कृष्णमय हो जाता है। मंदिरों को सजाया जाता है, जगह-जगह भजन-कीर्तन और झांकियां सजती हैं और भक्त आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म का इंतजार करते हैं। जन्म के समय लड्डू गोपाल का अभिषेक कर उनका श्रृंगार किया जाता है और आरती के साथ जन्मोत्सव मनाया जाता है। मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मभूमि और वृंदावन को उनकी बाल लीलाओं की भूमि माना जाता है, इसलिए यहां जन्माष्टमी का उत्सव देखने के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं। इस बार अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के संयोग की वजह से 2026 की जन्माष्टमी को और भी खास माना जा रहा है।

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