Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में बहुत उत्साह और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के राशि परिवर्तन के मौके पर मनाया जाता है। सूर्य 14 जनवरी को धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन को ही संक्रांति कहा जाता है। सूर्य एक राशि में लगभग 30 दिनों तक रहते हैं। इस तरह सूर्य हर महीने राशि परिवर्तन करते हैं। मेष से लेकर मीन तक 12 राशियों में हर महीने सूर्य की संक्रांति होती है। लेकिन इन सभी 12 संक्रांतियों में दो संक्रांति सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इनमें से एक है कर्क संक्रांति और दूसरी है मकर संक्रांति।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल दोपहर के समय सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर संक्रांति का स्नान, दान 14 जनवरी को किया जाएगा। मकर संक्रांति का महापुण्य काल दोपहर 3:13 से शाम 4:58 बजे तक रहेगा और पुण्य काल दोपहर 3:13 से शाम 5:46 बजे तक रहेगा। सूर्यदेव के उत्तरायण होते ही खरमास समाप्त हो जाएगा।
ज्योतिष के मुताबिक मकर शनि की राशि है और सूर्य शनि के पिता और ग्रहों के राजा हैं। ऐसे में दोनों का संबंध गहरा है। इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन से मांगलिक कार्यों की भी शुरुआत होती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत होती है। इस दिन सूर्य की उपासना की जाती है। जप, स्नान-दान के लिए यह अवधि सबसे खास होती है।
मकर संक्रांति पर पूरे उत्तर भारत में खिचड़ी और तिल से बनी चीजें खानेकी परंपरा है। इसलिए इस त्योहार को खिचड़ी और तिल संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि खिचड़ी खाने से नवग्रहों की स्थिति अनुकूल होती है। दरअसल, खिचड़ी का मुख्य तत्व चावल और जल चंद्रमा के प्रभाव में होता है। मकर संक्रांति को उड़द की दाल में खिचड़ी बनाने का विधान है। उड़द का संबंध शनि से माना गया है। हल्दी का संबंध गुरु ग्रह से है। खिचड़ी में प्रयोग की जाने वाली सब्जियों का संबंध बुध से है। घी का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य से भी है। घी से शुक्र और मंगल भी प्रभावित होते हैं।
सेहत के लिए जरूरी क्यों है पतंग उड़ाना?
मकर संक्रांति के पर्व में देश के कई हिस्सों में, खासकर पतंग उड़ाने का भी रिवाज है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, पतंग उड़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। यह त्योहार सर्दियों में आता है, जब लोग बीमारियों की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। पतंग उड़ाते समय शरीर धूप के संपर्क में आता है, जिससे विटामिन-डी मिलता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साथ ही, पतंग उड़ाना एक शारीरिक गतिविधि है, जो रक्त संचार बेहतर करती है और शरीर को गर्म रखती है।