Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर तिल का दान दिला सकता है शनि दोष से छुटकारा, जानें इस उपाय के बारे में

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के अवसर पर मनाया जाता है। ये दिन हिंदू धर्म की पवित्र तिथियों में से एक माना जाता है। इस दिन तिल का दान करने से शनि की साढ़े साती, ढैय्या और शनि के अशुभ प्रभाव से छुटकारा मिल सकता है

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 7:34 PM
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मकर संक्रांति पर गंगा नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है।

Makar Sankranti 2026: सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य किसी भी राशि में लगभग 30 दिनों तक रहते हैं। इस तरह सूर्य 12 राशियों में चक्कर लगाते हैं और साल में मेष, वृषभ और कर्क सहित 12 संक्रांति होती है। लेकिन मकर राशि में प्रवेश को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। एक तो इस दिन सूर्य गुरु की राशि धनु से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जो उनके अपने पुत्र यानी शनि की राशि है। दूसरे, इस दिन के बाद से एक महीने से चल रहा खरमास समाप्त हो जाता है, जो सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से शुरू हुआ था। इसके बाद से शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इसलिए, मकर संक्रांति पर गंगा नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन शनि दोष से छुटकारा पाने के लिए कुछ उपाय किए जाएं तो राहत मिलती है। आइए जानें इन उपायों के बारे में।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति पर तिल दान करना शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति पर तिल का दान उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है जिनकी जन्मकुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो या सूर्य कमजोर हो। जिन राशियों पर साढ़ेसाती लगी है, उन्हें इस दिन दान-पुण्यकर्म अवश्य करना चाहिए। वर्तमान समय में मेष राशि, कुम्भ राशि और मीन राशि पर साढ़ेसाती चल रही है तथा सिंह राशि और धनु राशि पर ढैय्या का प्रभाव है। काला तिल शनि का प्रतीक है, दान के माध्यम से शनि के कठोर प्रभाव को कम किया जा सकता है। शनि की साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या, शनि की महादशा अथवा कंटक शनि की स्थिति में भी ये लाभदायक है।

केवल शनि ही नहीं सूर्य सहित सभी ग्रहों का उपाय मकर संक्रांति के शुभ संचरण काल में किया जाता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति लगते ही देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं और अशुभ तत्वों का काल समाप्त हो जाता है। इसलिए मांगलिक कार्यों भी शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति के बाद माघ मास की अमावस्या यानि मौनी अमावस्या भी ग्रह शांति के लिए विशेष है। अमावस्या तिथि पितरों के साथ शनि शांति के लिए उपयुक्त है, अतः मकर संक्रांति और फिर मौनी अमावस्या, इन दोनों पर्वों के दिन अगर तेल में चेहरा देखकर छाया दान किया जाए तो ग्रह कष्टों का सरलतापूर्वक शमन होता है। काले तिल का दान अथवा काले तिल से लड्डू बनाकर मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के दिन दान करने से जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन दिखाई पड़ता है।

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