Makar Sankranti 2026: सेहत के लिए वरदान है सूर्य का उत्तरायण होना, जानें क्यों नहीं बदलती इस त्योहार की तारीख और इसके नियम

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में हर साल 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। इस दिन सूर्य राशि में प्रवेश करते हैं और सर्दियों का मौसम धीरे-धीरे विदा होता है। ये पर्व धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ सेहत के लिए भी अहम होता है। आइए जानें इस दिन के नियम

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 12:18 PM
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से खरमास समाप्त होते हैं और मांगलिक कार्य शुरू होते हैं।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, सूर्य भगवान को अर्घ्य देते हैं और दान-पुण्य करते हैं। यह पर्व सर्य के मकर राशि में प्रवेश के मौके पर मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से खरमास समाप्त होते हैं और मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। इसके अलावा इस दिन को कृषि पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन से फसलों के कटाई का समय शुरू होता है। साथ ही, ये सर्दियों के मौसम के धीरे-धीरे विदा होने और दिन लंबे होने का संकेत देता है।

मकर संक्रांति के बाद से सूर्य उत्तर की यात्रा शुरू करते हैं, जिससे सूर्य का प्रकाश पहले के मुकाबले ज्यादा तीव्रता से धरती तक पहुंचता है और उसे गर्म करता है। ये पर्व कृषि, धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अहम होने के साथ-साथ सेहत के नजरिए से भी महत्वपूर्ण होता है। खास बात ये है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व पूरे देश में इसी समय के आसपास, लेकिन विभिन्न नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में मकर संक्रांति और खिचड़ी पर्व, गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब में माघी/लोहड़ी और असम में माघ बिहू/भोगाली बिहू।

सूर्य का उत्तरायण होना सेहत के लिए फायदेमंद

सूर्य के उत्तरायण होने से दिन धीरे धीरे बड़े होने लगते हैं और सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक धरती पर रहता है। इससे शरीर को प्राकृतिक रूप से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। सर्दियों के बाद बढ़ती धूप से विटामिन डी की पूर्ति होती है, जो हड्डियों और प्रतिरक्षा तंत्र के लिए आवश्यक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, उत्तरायण के समय शरीर की पाचन शक्ति धीरे धीरे मजबूत होने लगती है।

जीवन में नई दिशा देता है ये पर्व

मकर संक्रांति का पर्व जीवन को नई दिशा देने वाला माना जाता है। जैसे सूर्य अपनी गति बदलकर उत्तर की ओर बढ़ता है, वैसे ही व्यक्ति को भी अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। यह समय पुराने नकारात्मक विचारों को छोड़कर सकारात्मक सोच अपनाने का संकेत देता है। उत्तरायण में दिन का बढ़ना प्रकाश, आशा और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है।


धार्मिक कर्म और पुण्य का विशेष समय

धार्मिक दृष्टि से उत्तरायण का पर्व स्नान और दान-पुण्य कर्मों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस अवधि में गंगा स्नान, तिल दान और दीपदान जैसे कर्मों का विशेष फल मिलता है। मान्यता है कि उत्तरायण में सूर्य की किरणें अधिक सात्विक होती हैं, जो मन और आत्मा को शुद्ध करती हैं।

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