Mauni Amavasya 2026 Today: मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है। माघ महीने की अमावस्या को ही मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने और उसके बाद दान-पुण्य करने का बहुत महत्व है। यूं तो पूरे माघ महीने का आध्यात्मिक और धार्मिक नजरिये से खास महत्व है। लेकिन इसकी अमावस्या तारीख को हिंदू धर्म में सबसे पवित्र माना जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी 12 अमावस्या तिथियों में मौनी अमावस्या का सबसे अधिक महत्व है। इस दिन स्नान-दान करने से कई पीढ़ियों के पाप मिट जाते हैं। इस साल यह दिन कई मायनों में खास है क्योंकि इस दिन सूर्य देव मकर राशि में होंगे। यह दिन रविवार को पड़ने से एक दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है।
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 17 जनवरी, शनिवार की रात 12 बजकर 5 मिनट से प्रारंभ होगी और 18 जनवरी, रविवार की रात 1 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। पंचांग के अनुसार सूर्योदय के समय अमावस्या होने के कारण यह पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा।
भगवान विष्णु और पूर्वजों को समर्पित है यह दिन
मौनी अमावस्या मुख्य रूप से भगवान विष्णु और पूर्वजों को समर्पित है। इस दिन वैकुंठ के स्वामी और सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इससे उनका आशीर्वाद मिलता है। माघी अमावस्या पूर्वजों को मोक्ष दिलाने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पूर्वजों को स्वर्ग मिलता है।
मौनी अमावस्या पर जो लोग सूर्योदय से पहले गंगा जैसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं, उन्हें बहुत पुण्य मिलता है। मकर राशि में सूर्य की उपस्थिति इस दिन के महत्व को और बढ़ा देती है। मकर संक्रांति के बाद से दिन धीरे-धीरे लंबे होने लगते हैं, जो जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक है।
मौनी अमावस्या पर काले और लाल कंबल, गर्म कपड़े, जूते, तिल और गुड़ का दान करने से पितृ दोष शांत होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
अमावस्या पर करें पितृ कर्म
मौनी अमावस्या का दिन पितृ दोष से मुक्ति और पितृ कर्म करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। जो लोग इस दिन दान और पितृ अर्पण करते हैं, उन्हें न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि उनके वंश में भी तरक्की होती है। ऐसा माना जाता है कि माघ महीने में गंगा में स्नान करने वालों को वैकुंठ धाम मिलता है।