Mesh Sankranti 2026: मेष राशि में सूर्य देव के प्रवेश को मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, ज्योतिष मान्यता के अनुसार सूर्य एक राशि में लगभग 30 दिनों तक रहते हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन पर संक्रांति मनाई जाती है। इस तरह एक वर्ष या हिंदू कैलेंडर में 12 संक्रांतियां मनाई जाती हैं।
खत्म होगा खरमास, शुरू होंगे मांगलिक कार्य
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को आत्मा का कारक माना जाता है। सूर्य जब बृहस्पति की राशियों धनु और मीन में रहते हैं, तब खरमास लगता है। इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं, क्योंकि सूर्य इन राशि में कमजोर अवस्था में रहते हैं। अत: सूर्य जब धनु से मकर राशि में जाते हैं, तो मकर संक्रांति और मीन से मेष राशि में जाते हैं तो मेष संक्रांति मनाते हैं। इसके बाद से शुभ और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
इन राज्यों में मनाया जाएगा नया साल
इसका सामाजित पक्ष ये है कि मेष संक्रांति से नए सूर्य कैलेंडर यानी नए साल की शुरुआत होती है। देश के कई राज्यों में इस दिन नए साल का त्योहार मनाया जाता है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश पर पंजाब में वैसाखी, ओडिशा में पाना संक्रांति और अगले दिन, इसे पश्चिम बंगाल में पोहेला वैशाख, केरल में विशु और तमिलनाडु में पुथंडू के तौर पर मनाया जाता है।
साल 2026 में मेष संक्रांति सोमवार, 14 अप्रैल को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में होगी। आइए जानें इसका पुण्य और महा पुण्य काल मुहूर्त
मेष संक्रांति मंगलवार, 14 अप्रैल, 2026
पुण्य काल 14 अप्रैल, 2026 सुबह 06:09 – दोपहर 01:03 06 घंटे 54 मिनट
महा पुण्य काल 14 अप्रैल, 2026 सुबह 06:09 – सुबह 08:27 02 घंटे 18 मिनट
इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद सूर्य देव की पूजा करते हैं। वहीं, पूजा के बाद जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से साधक को आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है।
ज्योतिषियों की मानें तो मेष संक्रांति पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन योग में सूर्य देव की उपासना करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी। मेष संक्रांति पर शिववास योग का संयोग देर रात 12 बजकर 12 मिनट तक है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त का भी संयोग बन रहा है। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 24 मिनट से लेकर 12 बजकर 15 मिनट तक है। इसके साथ ही कौलव और तैतिल करण के संयोग हैं। इन योग में सूर्य देव की उपासना करने से सभी प्रकार के शुभ कामों में सफलता मिलेगी।