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Nag Panchami 2026: 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का संयोग, इस दिन ये 5 चीजें भूल कर भी न करें

Nag Panchami 2026:नाग पंचमी का पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सांपों की पूजा की जाती है। इस साल नाग पंचमी का पर्व सावन माह के तीसरे सोमवार को 17 अगस्त को मनाया जाएगा। आइए जानें इस दिन क्या नहीं करना चाहिए और क्या कर सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 12, 2026 पर 2:06 PM
Nag Panchami 2026: 17 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का संयोग, इस दिन ये 5 चीजें भूल कर भी न करें
नाग पंचमी का पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म में नाग पंचमी के पर्व का विशेष स्थान है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से सांप के काटने का डर खत्म होता है। साथ ही, कालसर्प दोष की शांति के लिए भी यह दिन सबसे अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सांपों की पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल नाग पंचमी के त्योहार में 23 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाया जाएगा। इसी दिन सावन माह का तीसरा सोमवार भी है। इसलिए इस साल नग पंचमी का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लेकिन धर्म शास्त्रों के अनुसार, नाग पंचमी के दिन कुछ कामों को वर्जित माना गया है और ऐसा करने से अशुभ परिणाम प्राप्त होने की आशंका भी रहती है। इस दिन इस दिन धार्मिक नियमों का सही तरीके से पालन करने से घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। यह दिन भगवान शिव, नाग देवता और भगवान विष्णु की कृपा पाने का विशेष अवसर प्रदान करता है। आइए जानें नाग पंचमी के दिन क्या काम करना चाहिए और किन चीजों को न करें, ताकि महादेव नाराज नहीं हों।

नाग पंचमी पर क्या करें?

दोष निवारण उपाय: जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष या राहु-केतु जनित समस्या है, उन्हें इस दिन विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और नाग-नागिन के जोड़े को जल में प्रवाहित करना चाहिए।

द्वार पर नाग आकृति: घर के मुख्य द्वार पर गोबर या हल्दी-चंदन से नाग की आकृति बनाएं या तांबे व चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन करें।

शिव-पूजा और मंत्र जप: शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें और "ॐ नमः शिवाय" या "ॐ नागदेवताय नमः" का जप करें।

दान-पुण्य: इस दिन जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को धान का लावा (लाह), दूध, मिष्ठान और वस्त्र का दान करें।

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