Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी की सही तारीख है ये, जानें साल की सबसे बड़ी एकादशी का पूजा मुहूर्त और विधि

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी को साल की सबसे बड़ी एकादशी तिथि माना जाता है। इस दिन भक्त बिना अन्न और जल ग्रहण किए 24 घंटे से अधिक समय का व्रत करते हैं। यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर किया जाता है। आइए जानें इस साल ये एकादशी व्रत किए दिन होगा

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 6:12 PM
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निर्जला एकादशी का व्रत करने से दूसरी सभी एकादशियों का लाभ मिल जाता हैं।

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष को किया जाता है। यह पूरे साल यानी चंद्र मास पर आधारित हिंदू वर्ष के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथियों में से एक है। भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी तिथि के व्रत को उनका आशीर्वाद पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। निर्जला एकादशी भी ऐसा ही एक एकादशी व्रत है। मगर, इसे साल की सबसे बड़ी एकादशी तिथि माना जाता है। निर्जला एकादशी, जैसा कि नाम सही स्पष्ट है, इसमें भक्त भगवान विष्णु की आराधना बिना अन्न जल के करते हैं। यानी इस व्रत में लगभग 24 घंटे से अधिक समय बिना अन्न-जल के उपवास करते हैं। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगने के कारण ये एकादशी और भी खास मानी जा रही है।

निर्जला एकादशी व्रत 2026 तारीख

निर्जला एकादशी का व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून को शाम 6 बजकर 12 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 25 जून को रात 8 बजकर 9 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026 को रखा जाएगा।

निर्जला एकादशी व्रत पारण

निर्जला एकादशी व्रत का पारण 26 जून 2026 को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ समय 26 अप्रैल को सुबह 06:03 बजे से सुबह 08:42 बजे तक रहेगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त


निर्जला एकादशी की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त 25 जून को सुबह 4 बजकर 37 मिनट से सुबह 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। वहीं, इस दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से दोपहर 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

निर्जला एकादशी  व्रत विधि

निर्जला एकादशी व्रत की शुरुआत सुबह सूर्योदय से पूर्व स्नान करके प्रारंभ किया जाता है और अगली सुबह पारण के समय तक अन्न और जल से परहेज रहता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से आत्मशुद्धि, संयम और ईश्वर में समर्पण की अनुभूति गहरे रूप से होती है। व्रत के दौरान तुलसी, भक्ति गीत, विष्णु सहस्रनाम आदि का पाठ करना शुभ माना जाता है।

क्यों है निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी?

निर्जला एकादशी का व्रत बिना अन्न और पानी के रखा जाता है। इस व्रत में कठोर नियम का पालन किया जाता है इसलिए सभी एकादशी व्रतों में निर्जला एकादशी व्रत सबसे कठिन और बड़ी मानी जाती है। वहीं जो श्रद्धालु साल की सभी चौबीस एकादशियों का उपवास करने में सक्षम नहीं है वो केवल निर्जला एकादशी का व्रत कर सकते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत करने से दूसरी सभी एकादशियों का लाभ मिल जाता हैं।

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