Bhaum Pradosh Vrat 2026: भौम प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा का मुहूर्त और क्यों खास माना जाता है भौम प्रदोष व्रत

Bhaum Pradosh Vrat 2026: आज वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत किया जा रहा है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है और इसमें प्रदोष काल में पूजा की जाती है। यह व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि किया जाता है। आइए जानें आज के व्रत में पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है

अपडेटेड Apr 28, 2026 पर 1:16 PM
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मंगलवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर भौम प्रदोष व्रत होता है।

Bhaum Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में किया जाता है। इसलिए इस व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसके अलावा, यह तिथि जिस दिन पड़ती है, प्रदोष व्रत का नाम इसी से तय होता है। जैसे सोमवार को त्रयोदशी तिथि को पड़ेगी, तो सोम प्रदोष व्रत होगा। वहीं, मंगलवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने पर भौम प्रदोष व्रत होता है। इस तिथि का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मंगलवार का दिन भगवान शिव के रुद्रावतार संकटमोचन को समर्पित है और प्रदोष व्रत स्वयं देवाधिदेव महादेव के लिए किया जाता है।

भौम प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि

द्रिक पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल यानी आज शाम 6 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 29 अप्रैल को शाम 7 बजकर 51 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि को देखते हुए ये व्रत आज किया जा रहा है।

क्यों खास है भौम प्रदोष व्रत?

प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो उसे भौम प्रदोष कहा जाता है। इसे बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। साथ ही आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक शक्ति मजबूत होती है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि


प्रदोष व्रत की पूजा सरल होती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। दिनभर व्रत रखने के बाद सूर्यास्त के बाद यानी प्रदोष काल में पूजा की जाती है। पूजा स्थान को साफ करके भगवान शिव का शिवलिंग या चित्र स्थापित करें। इसके बाद जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। चंदन लगाएं और बेलपत्र, धतूरा व फूल अर्पित करें। दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाएं। फिर, ऊं नमः शिवाय या अन्य शिव मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती करें और भगवान को भोग लगाएं। इस दिन प्रदोष व्रत कथा भी सुन या पढ़ सकते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप

प्रदोष व्रत में 'ऊं नमः शिवाय' और 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करना बहुत लाभकारी माना जाता है। नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है और मन को शांति मिलती है।

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