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Nirjala Ekadashi Vrat 2025: निर्जला एकादशी व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूर्ण फल

Nirjala Ekadashi Vrat 2025: निर्जला एकादशी हिंदू कैलेंडर की सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है, जो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आती है। सालभर की 24 एकादशियों में इसका महत्व सबसे अधिक है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 04, 2025 पर 10:23 AM
Nirjala Ekadashi Vrat 2025: निर्जला एकादशी व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी मिलेगा पूर्ण फल
Nirjala ekadashi 2025: निर्जला एकादशी को विशेष इसलिए माना जाता है क्योंकि इस दिन व्रती को जल तक नहीं पीना होता।

हिंदू धर्म में उपवास केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का अभ्यास भी है। इन्हीं व्रतों में से एक है निर्जला एकादशी, जिसे वर्ष की सबसे कठिन एकादशी माना जाता है। ये व्रत न केवल आस्था की परीक्षा लेता है, बल्कि पूरे साल की एकादशियों का पुण्यफल देने वाला भी माना गया है। निर्जला एकादशी ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में आती है और इसका विशेष नियम है—क बूंद पानी तक न पीना। ऐसे में ये व्रत न सिर्फ शारीरिक तपस्या है, बल्कि आत्मिक अनुशासन का प्रतीक भी है।

इसे करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट दूर होने का विश्वास होता है। इस दिन व्रती प्रभु भक्ति, दान और संयम के साथ अपना पूरा दिन समर्पित करते हैं। ये उपवास मन, वचन और कर्म की शुद्धि का एक गहन अभ्यास है।

निर्जला एकादशी 2025

इस बार निर्जला एकादशी दो अलग-अलग तिथियों  पर मनाई जा रही है।

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