Eid Ul-Adha 2025: बकरीद की तारीख तय! जानिए इस साल भारत में कब दी जाएगी कुर्बानी और क्या है इसका महत्व

Eid Ul-Adha 2025: बकरीद की तारीख चांद नजर आने पर ही तय होती है, इसलिए भारत और सऊदी अरब में इसे अलग-अलग दिन मनाया जाता है। इस त्योहार को ईद-उल-अजहा के नाम से जाना जाता है और यह पैगंबर इब्राहिम की अल्लाह के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण की याद दिलाता है

अपडेटेड Jun 04, 2025 पर 9:55 AM
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Eid Ul-Adha 2025: बकरीद सिर्फ एक धार्मिक त्योहार ही नहीं, बल्कि ये इंसानियत और परोपकार का संदेश भी देता है।

हर साल बकरीद का त्योहार न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ये एकता, परोपकार और इंसानियत का भी संदेश देता है। इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने जुल-हिज्जा की दसवीं तारीख को मनाया जाने वाला ये पर्व, मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत खास होता है। बकरीद की खुशियों की शुरुआत त्योहार से कई दिन पहले ही घरों में तैयारियों से होती है, जो उत्साह को और बढ़ा देती हैं। इस दिन की सबसे बड़ी परंपरा है कुर्बानी, जिसमें अपने प्रिय जानवर की बलि देकर अल्लाह की आज्ञा का सम्मान किया जाता है।

कुर्बानी का मांस जरूरतमंदों में बांटना इस त्योहार की खासियत है, जो समाज में भाईचारे और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। बकरीद का यह उत्सव केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि मानवता और सहिष्णुता की एक मिसाल भी है, जो हर दिल में प्रेम और सद्भाव का संचार करता है।

बकरीद की सही तारीख


हर साल की तरह इस बार भी बकरीद की तारीख चांद की स्थिति के आधार पर तय की जाती है। सऊदी अरब में जुल-हिज्जा के महीने का चांद 27 मई को दिखाई दिया। इसके बाद ये तय हुआ कि सऊदी अरब में बकरीद 6 जून को और भारत में 7 जून 2025 को मनाई जाएगी। इस तरह देश-विदेश में त्योहार की तारीखों में थोड़ा अंतर हो सकता है, क्योंकि चांद की दृष्टि स्थानीय होती है।

बकरीद पर क्यों की जाती है कुर्बानी?

इस्लामी इतिहास के अनुसार, हजरत इब्राहिम को अल्लाह ने सपने में आदेश दिया था कि वे अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी दें। हजरत इब्राहिम ने अपनी निष्ठा दिखाते हुए अपने बेटे की कुर्बानी देने की इच्छा जताई। परंतु अल्लाह ने उन्हें अपने आदेश में बदलाव कर एक जानवर की कुर्बानी करने को कहा। तब से ये परंपरा बकरीद के दिन निभाई जाती है, जो अल्लाह की आज्ञा और विश्वास का प्रतीक है।

बकरीद के दिन ध्यान रखें ये महत्वपूर्ण बातें

शांति और सौहार्द बनाए रखें: त्योहार के दिन किसी से वाद-विवाद या बहस न करें।

परिवार में सम्मान दें: बड़े-बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करें।

सकारात्मक सोच रखें: किसी के प्रति नकारात्मक विचार न रखें।

अल्लाह का नाम लें: हर काम की शुरुआत अल्लाह के नाम से करें।

सुख-शांति की दुआ करें: अपने परिवार और समाज के लिए खुशी और शांति की प्रार्थना करें।

बकरीद

बकरीद सिर्फ एक धार्मिक त्योहार ही नहीं, बल्कि ये इंसानियत और परोपकार का संदेश भी देता है। कुर्बानी के जरिए हम जरूरतमंदों के बीच खुशियां बांटते हैं और समाज में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। इसलिए बकरीद का महत्व सिर्फ त्यौहार तक सीमित नहीं, बल्कि ये जीवन जीने का एक सुंदर तरीका भी है।

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