Ram Mandir Pran Pratishtha: अयोध्या राम मंदिर में राजा राम के दरबार की स्थापना के लिए अनुष्ठान जारी, जानें कार्यक्रम की पूरी जानकारी

Ayodhya Pran Pratishtha: 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम को बाल स्वरूप में प्रतिष्ठित किया गया था। अब आगामी दूसरी प्राण प्रतिष्ठा में वे राजा राम के रूप में विराजमान होंगे। मंदिर के पहले तल पर उनका भव्य राजदरबार सजाया जाएगा, जहां वे राजसी रूप में माता सीता, भाइयों और भक्त हनुमान संग विराजमान होंगे

अपडेटेड Jun 03, 2025 पर 11:40 AM
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Ayodhya Pran Pratishtha: इस आयोजन की शुरुआत 2 जून को सरयू घाट से मातृ शक्तियों की जल कलश यात्रा से हुई।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की यात्रा अब अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच चुकी है। 22 जनवरी 2024 को रामलला को बालक रूप में मंदिर के गर्भगृह में प्रतिष्ठित किया गया था, जो भारतीय संस्कृति और श्रद्धा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। अब ठीक 16 महीने बाद भगवान श्रीराम की दूसरी बार प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है, लेकिन इस बार वे बाल रूप में नहीं बल्कि राजा राम के स्वरूप में विराजमान होंगे। मंदिर के पहले तल पर उनका राजसी दरबार सजाया जाएगा, जिसमें उनके साथ माता सीता, अनुज लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और परम भक्त हनुमान भी स्थापित होंगे।

ये आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, संस्कृति और श्रद्धा की भव्य पुनर्प्रतिष्ठा भी है। श्रद्धालुओं में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है और अयोध्या एक बार फिर भक्ति और उत्सव के रंगों में रंगने को तैयार है।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम


अयोध्या में उमड़े श्रद्धालु राजा राम के दर्शन को लेकर उत्साहित हैं। रामलला के बाद अब राजा रूप की प्रतिष्ठा श्रद्धा और भक्ति की नई लहर लेकर आई है। सुरक्षा के लिहाज से अयोध्या पूरी तरह से तैयार है। SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि सभी आयोजन स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं ताकि कोई असुविधा न हो।

एक साथ आठ मंदिरों में देव विग्रहों की प्रतिष्ठा

इस बार सिर्फ राजा राम ही नहीं, बल्कि राम मंदिर परिसर के सात अन्य उपमंदिरों में भी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इसमें शामिल हैं:

ईशान कोण में शिवलिंग

अग्नि कोण में श्री गणेश

दक्षिणी भुजा में हनुमान

नैरित्य कोण में सूर्य देव

वायव्य कोण में मां भगवती

उत्तरी भुजा में अन्नपूर्णा माता

दक्षिण-पश्चिम कोने में शेषावतार

मंदिर निर्माण का समापन समारोह

ये प्राण प्रतिष्ठा केवल धार्मिक नहीं बल्कि राम मंदिर निर्माण की अंतिम औपचारिकता भी मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में हुए पहले समारोह के 16 महीने बाद अब ये समापन योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होगा। मंदिर का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, जिसमें नागर शैली में निर्मित विशाल मंदिर, 380 फीट लंबा, 250 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा है।

अयोध्या के पंडितों ने निकाला विशेष मुहूर्त

पहले प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त काशी से लिया गया था, लेकिन इस बार अयोध्या के विद्वान पंडित प्रदीप शर्मा, राकेश तिवारी और रघुनाथ दास शास्त्री ने पांच जून को गंगा दशहरा के दिन का शुभ मुहूर्त निकाला है। इस दिन को द्वापर युग की शुरुआत और रामेश्वरम स्थापना से भी जोड़ा जाता है।

भव्य आयोजन और वैदिक परंपराओं की झलक

इस आयोजन की शुरुआत 2 जून को सरयू घाट से मातृ शक्तियों की जल कलश यात्रा से हुई। इसके बाद 3 से 5 जून तक तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान चलेगा। पांच जून को सुबह 6:30 से अनुष्ठान शुरू होकर, 11:25 से 11:40 के बीच अभिजीत मुहूर्त में राजा राम की प्रतिष्ठा होगी।

मुख्य यजमान को फिर से मिला सौभाग्य

पिछली बार की तरह इस बार भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र और उनकी पत्नी मुख्य यजमान होंगे। ये दूसरा अवसर है जब उन्हें ये दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

समापन के साथ एक नई शुरुआत

राजा राम की प्राण प्रतिष्ठा न केवल मंदिर निर्माण का समापन है, बल्कि भारतीय आस्था, परंपरा और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत की एक नई शुरुआत भी है। ये अयोध्या के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा।

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