Nirjala Ekadashi Vrat Paran 2026: आज इस विधि से करें निर्जला एकादशी व्रत का पारण, जानें एकादशी व्रत पारण शुभ समय कब से कब तक है

Nirjala Ekadashi Vrat Paran 2026: आज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है और आज निर्जला एकादशी व्रत का पारण किया जा रहा है। माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए पारण से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए जानें व्रत पारण का शुभ समय और विधि क्या है

अपडेटेड Jun 26, 2026 पर 7:00 AM
इस व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा।

Nirjala Ekadashi Vrat Paran 2026: निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इसके बाद इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने से उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-शांति आती है। निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा। पारण का सटीक समय और इसकी संपूर्ण विधि नीचे दी गई है :

निर्जला एकादशी 2026: पारण का शुभ समय

धार्मिक पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि पर पारण करने का सबसे उत्तम मुहूर्त इस प्रकार है :

पारण की तारीख : 26 जून 2026, शुक्रवार

शुभ मुहूर्त : सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे तक

एकादशी व्रत का पारण हमेशा सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर ही कर लेना चाहिए। हरि वासर के दौरान व्रत खोलना वर्जित होता है, इसलिए सुबह 5:25 के बाद का यह समय पूरी तरह शुद्ध और शुभ है।


व्रत पारण की संपूर्ण विधि

निर्जला एकादशी के व्रत का फल तभी पूर्ण मिलता है जब इसका पारण पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाए। इसकी विधि नीचे दी गई है :

सुबह जल्दी उठें और स्नान करें : पारण के दिन (26 जून) सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले रंग के) धारण करें।

पूजा और आरती : घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए विष्णु जी की आरती करें।

तुलसी दल और भोग : भगवान विष्णु को भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखें, क्योंकि तुलसी के बिना नारायण भोग स्वीकार नहीं करते।

दान-पुण्य : चूंकि यह ज्येष्ठ मास की एकादशी है, इसलिए पारण से पहले ब्राह्मणों या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना बेहद फलदायी माना जाता है। इस दिन पानी से भरा घड़ा (कलश), कलश के ऊपर खरबूजा या आम, पंखा, छतरी, वस्त्र और दक्षिणा दान करना बहुत शुभ होता है।

व्रत कैसे खोलें : दान करने के बाद भगवान का चरणामृत लेकर या मुख में तुलसी का पत्ता और थोड़ा सा जल डालकर अपने व्रत का पारण करें। इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें। भोजन में प्याज, लहसुन या चावल का प्रयोग न करें।

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