November Pradosh Vrat 2025: सोमवार को होगा नवंबर का पहला प्रदोष व्रत, सोम प्रदोष की पूजा विधि और मंत्र जानिए

November Pradosh Vrat 2025: प्रदोष का व्रत चंद्र मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है। ये व्रत हर माह में दो बार आता है और इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। आइए जानें नवंबर के पहले प्रदोष व्रत की विधि और मंत्र

अपडेटेड Nov 01, 2025 पर 5:32 PM
नवंबर का पहला प्रदोष व्रत सोमवार के दिन किया जाएगा।

November Pradosh Vrat 2025: नवंबर का पहला प्रदोष व्रत सोमवार के दिन किया जाएगा। प्रदोष व्रत का महत्व उसके दिन से और बढ़ जाता है। जैसे इस बार का प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ रहा है। सोमवार भगवान शिव का दिन है प्रदोष व्रत भी उन्हें ही समर्पित है। इसे हिंदू धर्म में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सबसे शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन शिव पूजन करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और सुख-समृद्धि भी वास करती हैं। इस दिन सूर्यास्त के बाद महादेव की उपासना का विधान है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से भाग्य में वृद्धि होती हैं और रोग-तनाव जैसी समस्याएं समाप्त होती हैं। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत 3 नवंबर को रखा जाएगा। आइए इस दिन के शुभ योग और महत्व।

नवंबर में पहला प्रदोष व्रत तारीख और समय

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 3 नवंबर को सुबह 5:07 बजे से प्रारंभ हो रही है। इस तिथि का समापन 4 नवंबर को देर रात 2:05 बजे होगा। उदया तिथि के मुताबिक, 3 नवंबर को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।

शुभ मुहूर्त

  • प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त शाम 5:34 बजे से प्रारंभ होकर रात 8:11 बजे तक बना रहेगा।
  • अमृत चौघड़िया शाम में 4:12 बजे से 5:34 बजे तक।
  • चल चौघड़िया शाम में 5:34 बजे से 7:12 बजे तक।
  • गोधूलि मुहूर्त 5:34 बजे से 6 बजे तक।


महामृत्युंजय मंत्र

ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि

तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!

पूजा विधि

  • चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
  • महादेव संग शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
  • शिवलिंग पर जल, शहद और दूध से अभिषेक करें।
  • महादेव को चंदन लगाएं अब पूरे शिव परिवार को फूल माला पहनाएं।
  • इस दौरान पार्वती माता को सुहाग की चीजें अर्पित करें।
  • इसके बाद शिव जी को बेलपत्र और शमी का फूल अर्पित करें।
  • फिर शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं।
  • मिठाई का भोग लगाएं और सुख-समृद्धि की कामना करें।
  • अंत में महादेव की आरती करें और अपनी क्षमतानुसार दान कर सकते हैं।

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