Parama Ekadashi 2026 Date: अधिक मास में कब किया जाएगा परम एकादशी का व्रत? जानें तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Parama Ekadashi 2026 Date: हिंदू कैलेंडर में एकादशी व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। लेकिन इस तिथि का महत्व अधिक मास में और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह तीन साल के अंतराल पर आती है। आइए जानें परम एकादशी की तारीख, पूजा विधि और मुहूर्त

अपडेटेड May 25, 2026 पर 6:30 PM
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ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को परम एकादशी कहा जाता है।

Parama Ekadashi 2026 Date: अधिक मास में आने वाले एकादशी व्रत को अन्य एकादशी से अधिक पुण्यदायी माना जाता है। अधिक माह हिंदू कैलेंडर के किसी माह में तीन साल में एक बार लगता है। ऐसा होने पर पूरे साल में आने वाली एकादशी तिथियों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो जाती है, क्योंकि इसमें अधिका मास की पद्मिनी और परम एकादशी का नाम भी जुड़ जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगा है। इस माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को परम एकादशी या कमला एकादशी कहा जाता है। यह व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत दुर्लभ और पवित्र माना गया है, क्योंकि यह साधारण वर्षों में नहीं आता, बल्कि लगभग हर तीन वर्ष में पुरुषोत्तम मास आने पर ही रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है।

परम एकादशी 2026 तारीख और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास के दौरान परम एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। ज्येष्ठ अधिक मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 11 जून 2026 को सुबह 12:57 बजे से होगी। इस तिथि का समापन 11 जून 2026 को रात 10:36 बजे तक होगा। उदयातिथि के अनुसार परम एकादशी का व्रत बृहस्पतिवार, 11 जून, 2026 को किया जाएगा।

शुभ चौघड़िया व पूजा मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:02 से सुबह 04:42 तक


अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:53 से दोपहर 12:49 तक

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:18 से शाम 07:38 तक

परम एकादशी व्रत का पारण

परम एकादशी व्रत का पारण 12 जून 2026 को सुबह 5 बजकर 23 मिनट से सुबह 8 बजकर 10 मिनट के बीच कर सकते हैं।

परम एकादशी का धार्मिक महत्व

चूंकि अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं, इसलिए इस मास में पड़ने वाली एकादशी का फल अन्य सामान्य एकादशियों की तुलना में अनंत गुना बढ़ जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से भयंकर से भयंकर दरिद्रता और कंगाली दूर हो जाती है।

धन के देवता कुबेर जी ने भी इस व्रत का पालन किया था, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें धनाध्यक्ष का पद दिया था। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट होते हैं। साल में आम तौर पर 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन अधिकमास के कारण इस वर्ष कुल 26 एकादशियां होंगी, जिनमें कृष्ण पक्ष की 'परम' और शुक्ल पक्ष की 'पद्मिनी' एकादशी सबसे विशेष हैं।

पूजा विधि

व्रत से एक दिन पहले (दशमी तिथि को) केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें।

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले रंग के) धारण करें और व्रत का संकल्प लें।

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, फल, पंचामृत, धूप, और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें।

भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करें और परमा एकादशी की व्रत कथा जरूर पढ़ें या सुनें।

इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। अगले दिन द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देने के बाद ही व्रत का पारण करें।

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