Parshuram Jayanti 2025: जानें क्यों मां को मारने के लिए मजबूर हुए भगवान परशुराम?

Parshuram Jayanti 2025: परशुराम जयंती 30 अप्रैल 2025 को है। भगवान परशुराम को जहां एक ओर आदर्श पुत्र माना जाता है, वहीं उनके जीवन की एक घटना सभी को चौंका देती है—जब उन्होंने पिता के कहने पर अपनी मां का वध कर दिया। यह प्रसंग उनकी निष्ठा, त्याग और धर्म की जटिलता को उजागर करता है

अपडेटेड Apr 16, 2025 पर 2:16 PM
Parshuram Jayanti 2025: भगवान परशुराम का स्वभाव उग्र और क्रोधित था

परशुराम जयंती हर साल अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाती है, जो भगवान परशुराम के जन्मदिन के रूप में प्रसिद्ध है। परशुराम को हिंदू धर्म के सात अमर व्यक्तियों में से एक माना जाता है और उनका योगदान महाभारत तथा रामायण दोनों ही महाकाव्य में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। वे भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं के गुरु थे और उनकी शिक्षा से ही ये योद्धा शक्ति और युद्ध कला में निपुण हुए थे। भगवान परशुराम का स्वभाव उग्र और क्रोधित था, जिसके कारण देवी-देवता भी उनके क्रोध से डरते थे।

उनकी वीरता और अनुशासन के कारण वे एक सम्मानित योद्धा के रूप में जाने जाते हैं। इस दिन उनकी पूजा की जाती है, ताकि उनके आदर्शों का पालन करते हुए जीवन में शांति और सफलता प्राप्त की जा सके।

परशुराम की कड़ी परीक्षा


परशुराम के जीवन में एक बेहद दुखद और दिलचस्प घटना घटी, जब उन्होंने अपनी मां का वध कर दिया। पौराणिक कथाओं के अनुसार, परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि ने अपने पुत्रों से अपनी मां को मारने का आदेश दिया था। तीनों भाई इस आदेश का पालन करने से मना कर देते हैं, लेकिन परशुराम ने बिना किसी सवाल के पिता के आदेश का पालन किया और अपनी माता का वध कर दिया।

माता के वध का कारण

ये घटना तब हुई जब माता रेणुका एक दिन सरोवर में स्नान करने गईं। उस दौरान राजा चित्ररथ ने नाव विहार किया, जिसे देख उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हुई और उनका मन विचलित हो गया। इस पर महर्षि जमदग्नि ने अपनी दिव्य दृष्टि से सब कुछ देख लिया और उन्होंने गुस्से में आकर अपने पुत्रों को माता को मारने का आदेश दिया। जब बाकी तीनों पुत्रों ने इनकार कर दिया, तब परशुराम ने पिता का आदेश पालन किया और अपनी माता का सिर काट दिया।

पिता के आदेश पर परशुराम ने मांगे तीन वरदान

जब महर्षि जमदग्नि अपने पुत्र परशुराम से खुश हुए, तो उन्होंने उन्हें वरदान देने का वादा किया। परशुराम ने तीन वरदान मांगे:

माता रेणुका को पुनर्जीवित किया जाए।

उनके चारों भाइयों को ठीक किया जाए।

उन्हें कभी पराजय का सामना न करना पड़े और दीर्घायु होने का वरदान दिया जाए।

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