Phalguna Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा व्रत पर इस विधि से करें पूजन, जानें चंद्र ग्रहण की वजह किस दिन होगा व्रत और चंद्रोदय का समय

Phalguna Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन इस साल चंद्र ग्रहण लग रहा है। इसकी वजह से पूर्णिमा के व्रत, स्नान और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि को लेकर लोगों में काफी कंफ्यूजन है। आइए जानें हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा तिथि का व्रत इस साल किस दिन और किस विधि से होगा

अपडेटेड Feb 26, 2026 पर 5:47 PM
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इस साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ने से इसके धार्मिक अनुष्ठान को लेकर काफी भ्रम है।

Phalguna Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को स्नान, दान और व्रत के लिए बहुत पुण्यदायी माना जाता है। यह तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित होती है और इसमें सत्यनारायण भगवान की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने का विधान है। हिंदू कैलेंडर के अंत में हर माह आने वाली पूर्णिमा में फाल्गुन मास की पूर्णिमा का विशेष स्थान है क्योंकि यह चंद्र वर्ष के अंत का संकेत देती है। साथ ही इस दिन होलिका दहन किया जाता है, जो अगले दिन रंगों के पर्व होली के प्रारंभ का प्रतीक है। लेकिन इस साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ने से भक्तों में इस तिथि के धार्मिक अनुष्ठान को लेकर काफी भ्रम है। चंद्र ग्रहण के दौरान बहुत से धार्मिक कर्मकांड नहीं किए जाते हैं। आइए जानें इसका शास्त्र सम्मत क्या समाधान है

क्या है फाल्गुन पूर्णिमा को लेकर भ्रम ?

इस साल फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि दो अलग-अलग कैलेंडर दिनों में पड़ रही है, जिससे लोगों को सही व्रत तिथि को लेकर उलझन हो रही है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:56 बजे शुरू होगी और 3 मार्च 2026 को शाम 5:08 बजे समाप्त होगी। इसी बीच 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ग्रहण के कारण सूतक काल लगेगा और कई धार्मिक कार्यों पर रोक रहेगी।

2 मार्च को होगा फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत

शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन पूर्णिमा तिथि में चंद्रमा का उदय होता है। इस गणना के अनुसार 2 मार्च 2026 को व्रत रखना उचित माना गया है।

फाल्गुन पूर्णिमा पर स्नान-दान मुहूर्त


पूर्णिमा के दिन स्नान और दान के लिए दो विशेष शुभ समय माने गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:19 बजे से 6:08 बजे तक रहेगा, जिसे आध्यात्मिक साधना और पवित्र स्नान के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:27 बजे से 1:14 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन चंद्रोदय शाम 6:44 बजे होगा, जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।

फाल्गुन पूर्णिमा पर स्नान और दान की विधि

3 मार्च को ग्रहण होने के बावजूद फाल्गुन पूर्णिमा स्नान और दान किया जा सकता है। इसलिए तिथि के महत्व को ध्यान में रखते हुए नियमों का पालन करें।

  • चूंकि पूर्णिमा तिथि सुबह से प्रभावी रहेगी, इसलिए सूतक काल आरंभ होने से पहले स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  • यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर पर स्नान करते समय जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करना विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना गया है।
  • 3 मार्च की शाम या अगले दिन प्रातः सफेद वस्तुएं जैसे चावल, दूध, दही या सफेद वस्त्र का दान करना उत्तम रहता है।
  • ऐसा करने से चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं व दोष कम होते हैं।

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व

फाल्गुन पूर्णिमा अन्य पूर्णिमाओं की तुलना में अधिक शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। भक्त धन, सुख-शांति और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं। इस व्रत से जुड़ी मान्यताएं:

  • धन और आर्थिक स्थिरता में वृद्धि
  • संतान सुख और परिवार की उन्नति
  • लंबे समय से रुकी इच्छाओं की पूर्ति

चंद्रमा की पूजा से मानसिक शांति

ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उन्हें यह व्रत रखने की सलाह दी जाती है। इस दिन स्नान और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि

  • सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को प्रणाम करके व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें।
  • लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उनकी प्रतिमा स्थापित करें।
  • तिलक, फूल और वस्त्र अर्पित करें।
  • विष्णु मंत्रों का जाप करें और भोग लगाएं।
  • पूर्णिमा कथा पढ़ें और आरती करें।
  • चंद्रमा निकलने के बाद कच्चे दूध में पानी मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।
  • पहले प्रसाद ग्रहण करें, फिर भोजन करके व्रत खोलें।

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