Pitra Paksha 2025: श्राद्ध में अपने वंशजों से मिलने इन 3 रूपों में आते हैं पितृ, जानें इनके बारे में

Pitra Paksha 2025: हर साल भाद्रपद मास की अमावस्या से पितृ पक्ष की अवधि शुरू होती है। मान्यता है कि इस दौरान हमारे पितृ तीन रूपों में धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में कुछ चीजों को करने से बचना की नसीहत दी जाती है। जानें इनके बारे में

अपडेटेड Sep 02, 2025 पर 12:11 PM
अपने वंशजों से इन रूपों में मिलने आते हैं पितृ, इनका सम्मान जरूर करें।

Pitra Paksha 2025:15-16 दिनों तक चलने वाले श्राद्ध पक्ष की हिंदू धर्म में बहुत मान्यता है। यह समय हमारे पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करने का होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पितृ अपने वंशजों से मिलने धरती पर आते हैं। इसलिए इस अवधि में साफ-सफाई और पूजा-पाठ का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस अवधि में पितृ किस रूप में हमारे सामने आएंगे, ये कोई नहीं जानता। लेकिन शास्त्रों में इसके बारे में कुछ संकेत दिए गए हैं। इनके अनुसार पितृ पक्ष की अवधि में कुछ विशेष चीजों को करने से बचना चाहिए, अन्यथा पितृ नाराज होकर वापस चले जाते हैं। आइए जानें इनके बारे में

  • हिंदू धर्म में गाय को माता का स्थान दिया गया है। माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में गाय या कुत्ते को कभी दुत्कारना या भगाना नहीं चाहिए। इस अवधि में इनका दरवाजे पर आना या रास्ते पर दिखना भी अत्यंत शुभ होता है। इन्हें इनको कुछ न कुछ खाने को जरूर देना चाहिए इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
  • पितृ पक्ष में आने वाले अतिथि का उचित आदर-सत्कार करना चाहिए। सनातन धर्म में भी अतिथि को भगवान का दर्जा दिया गया है। पितृ पक्ष के दौरान पितर कभी-कभी घर के मेहमान के रूप में भी आ सकते हैं। इनका सम्मान करना चाहिए और उन्हें यथासंभव भोजन आदि अर्पित करना चाहिए।
  • हिंदू धर्म में दान-पुण्य का भी बहुत महत्व है। इस अवधि में अगर कोई साधु, संत या भिक्षुक कुछ मांगने आए तो उसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए। कहते हैं कि कई बार हमारे पितृ साधु-संत के रूप में प्रकट होते हैं। इस दौरान दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इनका अनादर नहीं करना चाहिए।

किन्हें लगता है पितृदोष ?

पितृ पक्ष के दौरान बहुत से रूप मे पितृ घर पर आते हैं। इसलिए भूल से भी उनका अपमान नही करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारे पूर्वजों की आत्माएं मृत्यु लोक से अपने परिवार के सदस्यों को देखती रहती हैं। जो लोग अपने पूर्वजों का अनादर करते हैं और पितृ पक्ष में शास्त्रीय विधि से तर्पण और पिंडदान नहीं करते हैं, तो हमारे पूर्वजों की आत्माएं तृप्त नहीं होती। ये अपने वंश के लोगों को कष्ट देती हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इसे ही पितृदोष कहा जाता है।

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