प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 'नवकार महामंत्र दिवस' कार्यक्रम में भाग लेकर आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति के प्रति अपनी गहरी आस्था को एक बार फिर दर्शाया। कार्यक्रम में शामिल होकर पीएम मोदी ने नंगे पांव नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप किया और श्रद्धा भाव के प्रतीक के रूप में आम लोगों के साथ बैठकर मंत्रोच्चार में भाग लिया। उन्होंने कहा कि ये अनुभव उनके अंदर गहराई तक उतर गया, जैसा उन्होंने पहले बेंगलुरु में एक सामूहिक मंत्रोच्चार कार्यक्रम में महसूस किया था।
प्रधानमंत्री ने नवकार महामंत्र को केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक जीवन मंत्र बताया। उन्होंने ये भी कहा कि ये मंत्र भीतर की नकारात्मकता को दूर कर आत्मशुद्धि की राह दिखाता है। इस अवसर पर देश-दुनिया से जुड़े हजारों लोग भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने
आत्मशुद्धि और मार्गदर्शन का मंत्र
पीएम मोदी ने कहा कि नवकार महामंत्र सिर्फ एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि ये जीवन को दिशा देने वाला एक मार्ग है। ये इंसान को भीतर से शुद्ध करता है और सौहार्द तथा आत्मशुद्धि की राह दिखाता है। उन्होंने बताया कि ये मंत्र नकारात्मकता, स्वार्थ और वैमनस्य जैसे अंदरूनी शत्रुओं को हराने की प्रेरणा देता है।
नव का महत्व और विकसित भारत का विजन
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में 'नव' का विशेष महत्व है—नव तत्व, नव संकल्प और नव विचार। प्रधानमंत्री ने इसे विकसित भारत के विजन से जोड़ा और दोहराया कि भारत विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी संभालेगा। उन्होंने ये भी बताया कि भगवान महावीर के निर्वाण महोत्सव को देशभर में मनाया गया और तीर्थंकरों की कई मूर्तियां विदेशों से वापस लाई गईं।
9 संकल्पों से नई ऊर्जा का संदेश
ज्ञान भारतम मिशन की शुरुआत
प्रधानमंत्री ने भाषण के अंत में 'ज्ञान भारतम मिशन' की घोषणा की, जिसका उद्देश्य लुप्त होती प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण और उन्हें सहेजना है। ये मिशन भारत के बौद्धिक और आध्यात्मिक गौरव को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।