Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत होगा इस दिन, जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को माह का अंतिम प्रदोष व्रत किया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित ये व्रत ये फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत होगा। आइए जानें इसी तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि कब होगी और इस व्रत का पारण कब होगा

अपडेटेड Feb 21, 2026 पर 7:00 AM
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रविवार 01 मार्च को फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष भगवान शिव को समर्पित होता है। इसमें प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के दो घंटे में पूजा की जाती है। माना जाता है कि व्रत को पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करने वाले भक्त के सिर पर स्वयं महादेव का हाथ रहता है और उसके जीवन से संकट कोसो दूर चले जाते हैं। देवाधिदेव महादेव को समर्पित ये पवित्र तिथि हर हिंदू माह में दो बार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में आती है। जैसे अब फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि आने वाली है। आइए जानें इस माह का अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा, इसमें पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा और

प्रदोष व्रत तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, रविवार 01 मार्च को फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार 28 फरवरी को रात 08 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी। वहीं, रविवार 01 मार्च को शाम 07 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसके लिए रविवार 01 मार्च को फाल्गुन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मनाया जाएगा।

रवि प्रदोष व्रत का महत्व

रविवार के दिन पड़ने के चलते यह रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा। रवि प्रदोष व्रत करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है।

रवि प्रदोष व्रत शुभ योग


ज्योतिष गणना के अनुसार, फाल्गुन माह के अंतिम प्रदोष व्रत पर दुर्लभ शोभन योग का संयोग बन रहा है। शोभन योग दोपहर 02 बजकर 33 मिनट तक है। शुभ कार्य करने के लिए शोभन योग को श्रेष्ठ माना जाता है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से शुभ कामों में सफलता मिलेगी।

रवि पुष्य योग

रवि प्रदोष व्रत पर रवि पुष्य योग का भी निर्माण हो रहा है। इस योग का संयोग सुबह 06 बजकर 58 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक है। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से अक्षय फल प्राप्त होगा। इसके साथ ही रवि योग का भी संयोग है।

नक्षत्र एवं चरण

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र का संयोग है। वहीं, कौलव, तैतिल और गर करण के योग हैं। इन योग में भक्ति भाव से शिव-शक्ति की पूजा की जाएगी।

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