Pradosh Vrat 2026: इस दिन किया जाएगा जनवरी का तीसरा और अंतिम प्रदोष व्रत, जानिए सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat 2026: साल के पहले महीने में तीन प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस महीने और नए साल की शुरुआत प्रदोष व्रत के साथ हुई थी। अब माघ मास के दूसरे और अंतिम प्रदोष व्रत के साथ जनवरी का महीना खत्म होगा। आइए जानें इसकी सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि क्या होंगे

अपडेटेड Jan 25, 2026 पर 7:00 AM
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जनवरी महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 30 तारीख को होगा।

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत हर हिंदू माह में दो बार किया जाता है, एक बार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को और फिर शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। इस तरह साल में 24 प्रदोष व्रत किए जाते हैं। माघ मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को इस माह का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत होगा। खास बात ये है कि ये जनवरी का तीसरा और अंतिम प्रदोष व्रत होगा। नए साल 2026 के पहले महीने जनवरी की शुरुआत भी प्रदोष व्रत के साथ हुई थी। प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पर्वती को समर्पित होता है। इस दिन प्रदोष काल में महादेव और मां पार्वती की पूजा करने से भक्तों के संकट दूर होते हैं और उनकी हर मनोकामना भी पूरी होती है। आइए जानें माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत कब किया जाएगा? इसका मुहूर्त और पूजा विधि क्या होंगे ?

प्रदोष व्रत तारीख

पंचांग के अनुसार, जनवरी महीने का आखिरी प्रदोष व्रत 30 तारीख को होगा। माघ मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी 2026 को सुबह 11:09 बजे शुरू होगी। यह अगले दिन यानि 31 जनवरी 2026 को सुबह 08:25 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल और तिथि को देखते हुए यह व्रत 30 जनवरी 2026 को ही करना उचित रहेगा। चूंकि यह व्रत शुक्रवार के दिन पढ़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा

पूजा मुहूर्त

पंचांग के अनुसार देवों के देव महादेव की पूजा के लिए उत्तम माना जाने वाला प्रदोष काल इस दिन सायंकाल 05:52 बजे से प्रारंभ होकर 08:26 बजे तक रहेगा। इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के लिए तरकीबन ढाई घंटे का समय मिलेगा।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि


धार्मिक मान्यता के अनसुार, प्रदोष व्रत वाले दिन सुबह और शाम को प्रदोष काल में भी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करनी चाहिए। प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में पूजा करें। सबसे पहले शिव को सबसे प्रिय लगने वाला गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप, फल, फूल, भस्म, बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ाकर प्रदोष व्रत की कथा कहें और पूजा के अंत में महादेव की विधि-विधान से आरती करें। पूजा के अंत में सभी को प्रसाद बांटने के बाद खुद भी ग्रहण करना चाहिए।

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव हर मास में दो बार पड़ने वाले प्रदोष व्रत को विधि-विधान से करने वाले अपने भक्त की सभी बाधाओं को हर लेते हैं। उस पर अपनी कृपा बरसाते हैं और सुख-समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करते हैं। शुक्र प्रदोष व्रत सभी दुख, रोग और शोक को दूर करके साधक को जीवन में तमाम तरह के सुख प्रदान करता है। प्रदोष व्रत के पुण्य प्रभाव से उसके यश और कीर्ति में वृद्धि होती है।

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