Pradosh Vrat Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। यह व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस तरह पूरे हिंदू वर्ष में ये व्रत 24 बार किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व होता है। भक्त उपवास रखकर संध्या काल में पूजा-अर्चना करते हैं और नियमपूर्वक व्रत का पारण करते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सही विधि से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर कर मनोकामनाएं पूर्ण करता है। उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, 19 मार्च को हिंदू नववर्ष की शुरुआत हुई है। उन्होंने बताया कि हिन्दू नववर्ष का पहला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा।
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च 2026 को सुबह 7.09 मिनट पर आरंभ होगी और इसका समापन 31 मार्च 2026 को सुबह 6.55 पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत सोमवार 30 मार्च को रहेगा। सोमवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष व्रत कहलाएगा।
30 मार्च को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 38 मिनट पर शुरू होगा। ये मुहूर्त रात 8 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
सोमवार के दिन पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि को सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जो बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अशुभ प्रभाव दे रहा हो, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी होता है। साथ ही, संतान सुख की इच्छा रखने वाले लोग भी इस व्रत को आस्था के साथ करते हैं।
प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ-सुथरा कर भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शिव परिवार की विधि-विधान से पूजा करें और बेलपत्र, पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें। इसके पश्चात प्रदोष व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। अंत में आरती कर शिव चालीसा पढ़ें और श्रद्धापूर्वक व्रत का पारण करें।