Get App

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को 3.18 घंटे रहेगा चंद्र ग्रहण, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और सूतक का समय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस साल सावन की पूर्णिमा के दिन साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लग रहा है। ऐसे में राखी बांधने के मुहूर्त पर क्या असर होगा और चंद्र ग्रहण का सूतक कब से कब तक रहेगा? आइए जानें

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 21, 2026 पर 9:01 PM
Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को 3.18 घंटे रहेगा चंद्र ग्रहण, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और सूतक का समय
इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व इस साल 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। लेकिन इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण लगने से एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण से क्या राखी का त्योहार प्रभावित होगा? इससे राखी बांधने के मुहूर्त पर क्या असर होगा? और सूतक काल कब से कब तक रहेगा?

बता दें, इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में संचार करेंगे, जहां पहले से ही छाया ग्रह राहु विराजमान हैं और केतु की भी दृष्टि बनी रहेगी। साथ ही सूर्य भी केतु से पीड़ित रहेंगे क्योंकि सिंह राशि में सूर्य और केतु की युति बन रही है। यह चंद्र ग्रहण 3 घंटे और 18 मिनट तक चलेगा। आइए जानें चंद्र ग्रहण के साये में कैसे मनेगा राखी का पर्व?

चंद्रग्रहण 2026 तारीख और समय

भारतीय समय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 8 बजकर 4 मिनट से होगी। चंद्र ग्रहण का मध्य काल 9 बजकर 43 मिनट पर होगा और समापन 11 बजकर 22 मिनट पर होगा। चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट की रहने वाली है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला नहीं है इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

28 अगस्त को होगा चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण आंशिक होगा। इस दौरान चंद्रमा का बड़ा भाग पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा, जिससे चंद्रमा गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आने लगेगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा। यह ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी एशिया (पाकिस्तान, अफगानिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र समेत सऊदी अरब, शारजाह, ईराक, ईरान आदि), अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में पूरी तरह दिखाई देने वाला है।

भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण

सब समाचार

+ और भी पढ़ें