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Shani Pradosh Vrat Upay: कल शनि प्रदोष व्रत पर करें ये उपाय, जानें पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और मंत्र

Shani Pradosh Vrat Upay: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनिवार को पड़ रही है। इसलिए कल शनि प्रदोष व्रत किया जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इस व्रत में अगर कुछ उपाय कर लिए जाएं, तो वो जीवन बदल सकते हैं। आइए जानें इसके बारे में

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 13, 2026 पर 8:19 PM
Shani Pradosh Vrat Upay: कल शनि प्रदोष व्रत पर करें ये उपाय, जानें पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और मंत्र
शनि प्रदोष की पूजा से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।

Shani Pradosh Vrat Upay: प्रदोष व्रत जब शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन भगवान शिव के साथ शनि देव की पूजा का भी महत्व माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष पर की गई पूजा से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। प्रदोष व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

इस तरह प्रदोष पूरे हिंदू वर्ष में 24 बार आता है। इस व्रत का महत्व उस दिन से और भी बढ़ जाता है, जिस दिन ये व्रत पड़ता है। इसलिए इस व्रत का हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। भगवान शिव को समर्पित इस व्रत में भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मां र्पावती और भगवान शिव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

इस साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष का शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 को पड़ रहा है। ऐसे में जो लोग लंबे समय से अड़चनों, मानसिक दबाव या रुकावटों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह दिन शिव भक्ति और संयम के साथ पूजा करने का अच्छा अवसर माना जाता है।

पूजा सामग्री

प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति/तस्वीर, गंगा जल या साफ जल, दूध, दही और शहद अभिषेक के लिए, घी या सरसों का तेल और रुई की बाती दीपक जलाने के लिए, धूप-अगरबत्ती, रोली, चंदन, अक्षत, बेल पत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, फल और मिठाई नैवेद्य के रूप में रखें। शनि प्रदोष के दिन काले तिल, उड़द की दाल, काले कपड़े का छोटा टुकड़ा, लोहे की कोई छोटी वस्तु और पीपल के नीचे दीपक जलाने के लिए सरसों का तेल भी साथ रखें, वहीं जप-पाठ के लिए रुद्राक्ष या सामान्य माला और शिव चालीसा/प्रदोष व्रत कथा की किताब रखना उपयोगी रहता है।

पूजा विधि : शनि प्रदोष के दिन सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर की सफाई करें और शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। घी का दीपक जलाएं और फल, फूल, धूप व नैवेद्य अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप करें और आरती करें। शाम को प्रदोष काल में दोबारा स्नान करके शिव मंदिर जाना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर जल, बेल पत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, शहद और गन्ना अर्पित करें। इसके बाद शनि प्रदोष व्रत की कथा सुनें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। पूजा के अंत में अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा याचना जरूर करें। पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जला कर शनिदेव की आरा धना करें।

शनि प्रदोष पर करें ये उपाय

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